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नमस्कार दोस्तों, आप सुन रहे हैं “पाई अनकट” हिंदी, जहाँ हम पैसों से जुड़ी उन बातों को आसान भाषा में समझते हैं, जो स्कूल में नहीं सिखाई जातीं, लेकिन ज़िंदगी में सबसे ज़्यादा काम आती हैं। आज की बातचीत एक बहुत आम लेकिन बहुत गलत धारणा पर है। यह धारणा है कि अगर आपकी कमाई बढ़ गई, तो आप अपने आप अमीर बन जाएंगे। ज़्यादातर लोग यही मानते हैं कि ज्यादा सैलरी, ज्यादा पैसा और ज्यादा मेहनत का मतलब सीधे तौर पर ज्यादा अमीरी है। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। आज हम समझेंगे कि क्यों ज्यादा पैसा कमाना अपने आप में आपको अमीर नहीं बनाता, और असली दौलत बनाने का रास्ता क्या है। यह कहानी खास तौर पर उन लोगों के लिए है जो नौकरी करते हैं, बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, या फिर सोचते हैं कि एक दिन बड़ी सैलरी मिलने के बाद सब कुछ अपने आप ठीक हो जाएगा। सबसे पहले एक बहुत सीधी बात समझते हैं। पैसा कमाना और पैसा बचाना दो अलग चीजें हैं। और पैसा बचाना और दौलत बनाना, ये दोनों भी अलग हैं। बहुत सारे लोग जिंदगी भर पैसा कमाते रहते हैं, लेकिन फिर भी आर्थिक रूप से आज़ाद नहीं हो पाते। कारण यह नहीं है कि वे कम कमाते हैं, बल्कि कारण यह है कि उनका पैसा कैसे इस्तेमाल होता है। मान लीजिए आपकी सैलरी बढ़ गई। अब आपके पास पहले से ज्यादा पैसा आ रहा है। लेकिन जैसे ही सैलरी बढ़ती है, आपकी लाइफस्टाइल भी बढ़ जाती है। पहले जो कार ठीक लगती थी, अब वह छोटी लगने लगती है। पहले जो घर पर्याप्त था, अब बड़ा घर चाहिए। पहले जो फोन काम चला रहा था, अब नया मॉडल जरूरी लगने लगता है। इसको ही लाइफस्टाइल इंफ्लेशन कहते हैं। यानी जितनी कमाई बढ़ती है, उतना ही खर्च भी बढ़ जाता है। नतीजा यह होता है कि बैंक बैलेंस वही रहता है, तनाव वही रहता है, और अमीरी बस सपना बनी रहती है। असल में, बहुत सारे लोग ज्यादा पैसा इसलिए कमाना चाहते हैं ताकि वे महंगी चीजें खरीद सकें। तेज कार, बड़ा घर, ब्रांडेड कपड़े। लेकिन इस सोच में एक बड़ी गलती है। अगर आप ज्यादा पैसा सिर्फ खर्च बढ़ाने के लिए कमा रहे हैं, तो आप अनजाने में दूसरों को अमीर बना रहे हैं, खुद को नहीं। आप ज्यादा मेहनत कर रहे हैं ताकि कार कंपनी, रियल एस्टेट डेवलपर और ब्रांड्स ज्यादा कमा सकें। असली सोच यह होनी चाहिए कि आप ज्यादा पैसा क्यों कमा रहे हैं। सही जवाब यह नहीं है कि ताकि मैं ज्यादा खर्च कर सकूं। सही जवाब यह है कि ताकि मैं ज्यादा निवेश कर सकूं। क्योंकि असली अमीरी आपकी सैलरी से नहीं, बल्कि आपकी संपत्ति से आती है। संपत्ति मतलब ऐसे एसेट्स, जो आपके लिए पैसा पैदा करें, चाहे आप काम करें या न करें। यहाँ एक बहुत महत्वपूर्ण विचार आता है, जिसे कई लोग दशक की कुर्बानी कहते हैं। इसका मतलब है कि आप करीब दस साल अपनी जिंदगी के ऐसे बिताते हैं, जहाँ आप जानबूझकर कम खर्च करते हैं, ज्यादा कमाने की कोशिश करते हैं, और जो अतिरिक्त पैसा बचता है, उसे निवेश में लगाते हैं। यह आसान नहीं होता। इसमें धैर्य चाहिए, अनुशासन चाहिए और कई बार सामाजिक दबाव को नजरअंदाज करना पड़ता है। लेकिन यही वह चरण है, जो आपको बाद में वह आज़ादी देता है, जहाँ आप बिना कीमत देखे चीजें खरीद सकते हैं। फर्क बस इतना होता है कि तब आप वो चीजें अपने एसेट्स की कमाई से खरीदते हैं, न कि अपनी सैलरी से। अब सवाल उठता है कि ज्यादा पैसा कमाया कैसे जाए। सबसे पहले समझिए कि खर्च कम करने की एक सीमा होती है। आप एक हद तक ही खर्च काट सकते हैं। आखिर आपको रहने के लिए घर चाहिए, पहनने के लिए कपड़े चाहिए, खाने के लिए खाना चाहिए। लेकिन कमाई बढ़ाने की कोई ऊपरी सीमा नहीं होती। यही वजह है कि असली फोकस कमाई बढ़ाने पर होना चाहिए, न कि सिर्फ खर्च घटाने पर। अगर आप नौकरी करते हैं, तो एक रास्ता है बेहतर सैलरी पाना। लेकिन यह यूं ही नहीं मिलती। सिर्फ बॉस के पास जाकर यह कहना कि मुझे दस हजार या बीस हजार ज्यादा चाहिए, काम नहीं करता। सही तरीका यह है कि आप खुद को ज्यादा मूल्यवान बनाएं। यानी आपकी स्किल्स ऐसी हों कि कंपनी को आप पर खर्च किया गया पैसा एक अच्छा निवेश लगे। इसके लिए आपको अपनी नौकरी से बाहर भी सीखना पड़ता है। नई स्किल्स, नई टेक्नोलॉजी, नई जिम्मेदारियाँ। और फिर यह दिखाना पड़ता है कि अगर आपको ज्यादा सैलरी दी जाती है, तो कंपनी को उसका फायदा कैसे होगा। जब आप यह साबित कर देते हैं कि आप कंपनी के लिए ज्यादा कमाई करा सकते हैं, तब आपकी सैलरी बढ़ाना बॉस के लिए खर्च नहीं, निवेश बन जाता है। दूसरा रास्ता है अपनी खुद की कमाई के स्रोत बनाना। यानी साइड इनकम या बिजनेस। यह कोई बहुत बड़ा स्टार्टअप ही होना जरूरी नहीं है। यह कुछ भी हो सकता है, जो आपकी स्किल या आइडिया से जुड़ा हो। कुछ लोग ऑनलाइन प्रोडक्ट बेचते हैं, कुछ लोग फ्रीलांसिंग करते हैं, कुछ लोग कंटेंट बनाते हैं। जरूरी यह है कि आप यह समझें कि आपकी ताकत क्या है और आप उससे पैसे कैसे कमा सकते हैं। यहाँ भी एक बात याद रखनी चाहिए। खुद की कमाई का मकसद भी सिर्फ खर्च बढ़ाना नहीं होना चाहिए। मकसद होना चाहिए ज्यादा एसेट्स खरीदना। चाहे वह शेयर हों, म्यूचुअल फंड हों, बिजनेस में रीइन्वेस्टमेंट हो या रियल एस्टेट। क्योंकि वही एसेट्स आगे चलकर आपको काम से आज़ादी देते हैं। अब हम एक ऐसे कदम की बात करते हैं, जिसे बहुत सारे लोग पूरी तरह भूल जाते हैं। और वह है अपनी बनाई हुई दौलत की सुरक्षा। मान लीजिए आपने मेहनत करके पैसा कमाया, निवेश किया और कुछ संपत्ति बना ली। अगर आपने उसे सही तरह से सुरक्षित नहीं किया, तो वह उतनी ही जल्दी खत्म भी हो सकती है। जैसे-जैसे आपके पास पैसा आता है, वैसे-वैसे ऐसे लोग भी आते हैं, जो उस पैसे पर हाथ साफ करना चाहते हैं। टैक्स की गलत प्लानिंग, कानूनी गलतियाँ, खराब सलाहकार, ये सब आपकी सालों की मेहनत को बर्बाद कर सकते हैं। इसीलिए अमीर लोग सिर्फ पैसा कमाने पर ध्यान नहीं देते, वे सही लोगों को भी साथ रखते हैं। अच्छे अकाउंटेंट, अच्छे टैक्स एक्सपर्ट, अच्छे लीगल एडवाइजर। ये खर्च नहीं होते, बल्कि सुरक्...