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परम पूज्य स्वामीश्री अखण्डानन्द सरस्वती जी महाराज के श्रीमुख से क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (गीता अध्याय - 13 ) पर दिव्य प्रवचन क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग (श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय - 13 ) - 42 सर्वेन्द्रियगुणाभासं सर्वेन्द्रियविवर्जितम् | असक्तं सर्वभृच्चैव निर्गुणं गुणभोक्तृ च || 15|| बहिरन्तश्च भूतानामचरं चरमेव च | सूक्ष्मत्वात्तदविज्ञेयं दूरस्थं चान्तिके च तत् || 16|| अविभक्तं च भूतेषु विभक्तमिव च स्थितम् | भूतभर्तृ च तज्ज्ञेयं ग्रसिष्णु प्रभविष्णु च || 17|| ज्योतिषामपि तज्ज्योतिस्तमस: परमुच्यते | ज्ञानं ज्ञेयं ज्ञानगम्यं हृदि सर्वस्य विष्ठितम् || 18|| इति क्षेत्रं तथा ज्ञानं ज्ञेयं चोक्तं समासत: | मद्भक्त एतद्विज्ञाय मद्भावायोपपद्यते || 19|| #swamiakhandanandsaraswati #kshetrakshetragyavibhagyog #geetach13 #anandprastuti #satsang #anandvrindavanashram