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गीता अध्याय 2: भगवान कृष्ण ने बताया सच्चे शिष्य की परिभाषा | सांख्य योग श्रीमद्भगवद्गीता के दूसरे अध्याय (सांख्य योग) में भगवान श्रीकृष्ण अपने शिष्य अर्जुन को आत्मा, कर्तव्य और शिष्यत्व का गहरा अर्थ समझाते हैं। जब अर्जुन मोह और शोक में डूब जाते हैं, तब वे स्वयं को भगवान के चरणों में समर्पित कर शिष्य बनते हैं। इस अध्याय में सच्चे शिष्य की पहचान बताई गई है — ✔ जो अहंकार त्यागकर ज्ञान ग्रहण करे ✔ जो गुरु के वचनों पर श्रद्धा रखे ✔ जो सत्य को समझने के लिए समर्पित हो ✔ जो धर्म और कर्तव्य के मार्ग पर दृढ़ रहे यह शिक्षा हमें सिखाती है कि जीवन में जब भ्रम और दुख आएँ, तब गुरु की शरण में जाकर ज्ञान प्राप्त करना ही सच्चा शिष्य धर्म है। यह वीडियो गीता के दूसरे अध्याय की सरल व्याख्या प्रस्तुत करता है, जिससे हम शिष्यत्व का वास्तविक अर्थ समझ सकें।