У нас вы можете посмотреть бесплатно कालभैरव अष्टकम् | Kalabhairava Ashtakam или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
कालभैरव अष्टकम्—आदि शंकराचार्य द्वारा रचित भगवान शिव के कालभैरव रूप की अष्ट श्लोकीय स्तुति—काल के संहारक को समर्पित है, जो काशी के स्वामी के रूप में सभी बाधाओं का नाश करता है और भक्तों को ज्ञान-मुक्ति प्रदान करता है। Sanskrit: text ॐ देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम् । नारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगम्बरं काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥१॥ भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम् । कालकालमम्बुजाक्षमक्षशूलमक्षरं काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥२॥ शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम् । भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियं काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥३॥ भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम् । विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिं काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥४॥ धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकं कर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम् । स्वर्णराजशेखरं शोणवर्णाङ्गमण्डलं काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥५॥ रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरञ्जनम् । मृत्युदर्पनाशनं करालदंष्ट्रमोक्षणं काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥६॥ अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसन्ततिं दृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम् । अष्टमूर्तिभिर्जुष्टं कपालमालिकन्धरं काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥७॥ भूतसङ्घनायकं विशालकीर्तिदायकं काशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम् । नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिं काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥८॥ कालभैरवाष्टकं पठन्ति ये मनोहरं ज्ञानमुक्तिसाधनं विचित्रपुण्यवर्धनम् । शोकमोहदैन्यलोभकोपतापनाशनं प्रयान्ति कालभैरवाङ्घ्रिसन्निधिं नरा ध्रुवम् ॥ श्लोकार्थ | Verse Meanings श्लोक १: देवराज इन्द्र की सेवा स्वीकार करने वाले पावन चरण कमल, सर्प व चन्द्र शिरोधारण, नारद आदि योगियों द्वारा वन्दित दिगम्बर काशी के स्वामी कालभैरव को भजता हूँ। श्लोक २: सूर्यकोटि समान तेजस्वी, भवसागर पारक, नीलकंठ, त्रिलोचन, काल के भी काल, अक्षय त्रिशूलधारी कालभैरव को भजता हूँ। श्लोक ३: त्रिशूल-पाश-दण्ड धारण करने वाले, श्यामकाय आदि देव, भयंकर पराक्रमी, ताण्डव प्रिय कालभैरव को भजता हूँ। श्लोक ४: भुक्ति-मुक्ति दाता, सुन्दर विग्रह, भक्तवत्सल, समस्त लोक स्वरूप, किंकिणी युक्त कटि वाले कालभैरव को भजता हूँ। श्लोक ५: धर्म रक्षक, अधर्म नाशक, कर्म बन्धन मुक्तिकर्ता, स्वर्ण शेखरधारी कालभैरव को भजता हूँ। श्लोक ६: रत्न पदुकाधारी, अद्वितीय इष्टदेव, मृत्यु भंजक, कराल दंष्ट्र मोक्षदाता कालभैरव को भजता हूँ। श्लोक ७: अट्टहास से ब्रह्माण्ड विप्लव करने वाले, दृष्टि पात से पाप नाशक, अष्टमूर्ति पूजित कालभैरव को भजता हूँ। श्लोक ८: भूत नायक, कीर्ति दाता, पुण्य-पाप शोधक, नीतिमार्ग ज्ञाता जगत्पति कालभैरव को भजता हूँ। English: Daily Practice: कालभैरव अष्टमी, शनिवार संध्या, प्रदोष काल में १०८ बार पाठ; सरसों तेल दीप दान के साथ जपें। Hindi: दैनिक अभ्यास: कालभैरव अष्टमी, शनिवार संध्या, प्रदोष काल में १०८ बार पाठ; सरसों तेल दीप दान के साथ जपें। Phalshruti/फलश्रुति: इस मनोहर अष्टक का पाठ करने वाले निश्चित रूप से कालभैरव चरण सन्निधि प्राप्त करते हैं—शोक, मोह, दैन्य, लोभ, कोप नाशक। Comment: कौन सा श्लोक आपके हृदय में कालभैरव जागृत करता है? | Which verse awakens Kaal Bhairav in your heart?