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भगवान शनि देव की असीम कृपा प्राप्त करने हेतु 'श्री शनैश्चर कवचम्' यह पवित्र कवच भगवान सूर्य के पुत्र, शनि देव को समर्पित है। ज्योतिष शास्त्र और पुराणों के अनुसार, शनि देव कर्मफल के प्रदाता हैं। इस कवच को 'वज्रपंजर' भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'वज्र के समान मजबूत पिंजरा' या सुरक्षा घेरा। जो व्यक्ति नित्य श्रद्धापूर्वक इसका पाठ करता है, शनि देव उसकी दसों दिशाओं और शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा करते हैं। पाठ करने के लाभ: ग्रह दोष निवारण: यह कवच विशेष रूप से साढ़ेसाती, ढैय्या और कुंडली में शनि के प्रतिकूल स्थान (जैसे 8वें या 12वें भाव) के प्रभाव को शांत करता है। भय से मुक्ति: शनि देव की कृपा से अज्ञात भय, मानसिक तनाव और शत्रुओं से सुरक्षा प्राप्त होती है। सौभाग्य की प्राप्ति: स्तोत्र के अनुसार, यह 'सर्वसौभाग्यदायकम्' है, अर्थात सभी प्रकार के सुख और ऐश्वर्य देने वाला है। स्वास्थ्य लाभ: इसमें शरीर के हर हिस्से के लिए रक्षा की प्रार्थना की गई है, जो असाध्य रोगों में भी राहत प्रदान करती है। साधना विधि: इसका पाठ शनिवार के दिन, विशेषकर शाम के समय (प्रदोष काल) में करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। पाठ के समय नीले या काले वस्त्र धारण करना और सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ होता है। #शनिदेव #शनिकवच #साढ़ेसाती #शनिदेवमहाराज #भक्ति #अध्यात्म #ज्योतिष #शनिवार #शनि_दोष_निवारण #हिन्दू_धर्म #ShaniKavach #ShaniDev