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मेरठ। जनपद में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना मुण्डाली पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम को बड़ी सफलता हाथ लगी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से हैंडिक्राफ्ट व डेकोरेशन आइटम्स सस्ते दामों में उपलब्ध कराने का झांसा देकर लोगों से ठगी करने वाले चार अभियुक्तों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, विभिन्न बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज तथा ठगी में प्रयुक्त हैंडिक्राफ्ट व डेकोरेशन का सामान बरामद किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई दिनांक 15 फरवरी 2026 को की गई। थाना मुण्डाली पुलिस एवं साइबर सेल टीम ने संयुक्त रूप से अभियान चलाते हुए Indian Cyber Crime Coordination Centre (i4C) के अंतर्गत संचालित ‘प्रतिबिंब पोर्टल’ पर लंबित साइबर फ्रॉड और धोखाधड़ी से संबंधित शिकायतों का गहन निरीक्षण किया। पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के विश्लेषण के दौरान कई मोबाइल नंबर और संबंधित IMEI नंबर संदिग्ध पाए गए। तकनीकी जांच में स्पष्ट हुआ कि इन नंबरों की सक्रियता थाना मुण्डाली क्षेत्र में है। तकनीकी जांच से खुला राज पुलिस ने सर्विलांस, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और डिजिटल ट्रैकिंग की सहायता से संदिग्ध नंबरों की लोकेशन ट्रेस की। जांच के दौरान यह सामने आया कि एक संगठित गिरोह योजनाबद्ध तरीके से सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को ठग रहा है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मेरठ के निर्देशानुसार पुलिस अधीक्षक ग्रामीण/अपराध मेरठ के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी किठौर के निकट पर्यवेक्षण में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने पतारसी और सुरागरसी करते हुए चार अभियुक्तों — सलमान, सलीम, मतलूब और जीशान — को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों के पास से कई मोबाइल फोन, सक्रिय सिम कार्ड, डिजिटल भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड तथा डेकोरेशन के नमूना सामान बरामद हुए हैं। सोशल मीडिया को बनाया हथियार पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने बताया कि वे Facebook, Instagram और WhatsApp जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर लोगों तक पहुंचते थे। गिरोह के सदस्य अलग-अलग नामों से कई फर्जी आईडी और पेज बनाते थे। इन पेजों पर आकर्षक डेकोरेशन आइटम्स, झूमर, शादी-ब्याह के साज-सज्जा के सामान, इवेंट डेकोरेशन सामग्री और हस्तशिल्प उत्पादों की तस्वीरें व वीडियो पोस्ट की जाती थीं। इन पोस्ट्स में बेहद कम दाम दिखाए जाते थे, जिससे ग्राहक आसानी से आकर्षित हो जाते थे। वीडियो और फोटो का फर्जी इस्तेमाल आरोपी VidMate ऐप की मदद से अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पहले से अपलोड की गई वीडियो और तस्वीरों को डाउनलोड करते थे। इसके बाद वे उन्हें एडिट कर अपने मोबाइल नंबर के साथ दोबारा पोस्ट कर देते थे। देखने में यह सामग्री बिल्कुल वास्तविक और पेशेवर लगती थी, जिससे लोगों को संदेह नहीं होता था। ग्राहक जब इन विज्ञापनों को देखते थे, तो वे स्वयं संपर्क करते थे। इसके बाद आरोपी व्हाट्सएप पर बातचीत शुरू करते और उत्पादों की अतिरिक्त तस्वीरें भेजकर भरोसा जीतते थे। कई बार वे नकली रिव्यू और फर्जी ग्राहकों की चैट स्क्रीनशॉट भी दिखाते थे, ताकि सामने वाला व्यक्ति पूरी तरह आश्वस्त हो जाए। ऐसे होती थी ठगी की पूरी प्रक्रिया सोशल मीडिया पर फर्जी पेज बनाना। आकर्षक फोटो-वीडियो अपलोड कर सस्ते दाम का लालच देना। ग्राहक से व्हाट्सएप पर संपर्क स्थापित करना। एडवांस पेमेंट की मांग करना। भुगतान प्राप्त होते ही ग्राहक से संपर्क तोड़ देना। आरोपी Google Pay और PhonePe जैसे डिजिटल भुगतान माध्यमों से अग्रिम धनराशि प्राप्त करते थे। कई मामलों में वे अलग-अलग खातों का इस्तेमाल करते थे ताकि रकम ट्रैक करना कठिन हो। भुगतान मिलने के बाद या तो वे ग्राहक को ब्लॉक कर देते थे या फिर बहाने बनाते रहते थे कि “सामान भेज दिया गया है” या “कूरियर में समस्या आ गई है।” अंततः ग्राहक को कोई सामान नहीं मिलता था। गांव की पहचान का उठाया फायदा पूछताछ में आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि उनका गांव डेकोरेशन और झूमर के कार्य के लिए प्रसिद्ध है। इसी प्रतिष्ठा का लाभ उठाकर वे लोगों का विश्वास जीतते थे। ग्राहक जब गांव का नाम सुनते थे, तो उन्हें भरोसा हो जाता था कि सामान वास्तविक होगा। इस मनोवैज्ञानिक रणनीति के माध्यम से गिरोह लंबे समय से ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा था। कई राज्यों के लोग बने शिकार प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि गिरोह ने केवल मेरठ ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों और जनपदों के लोगों को भी निशाना बनाया। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कुल कितनी शिकायतें इस गिरोह से जुड़ी हैं और ठगी की कुल राशि कितनी है। प्रतिबिंब पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का मिलान कर पीड़ितों से संपर्क किया जा रहा है। संभावना है कि आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं। पुलिस की अपील मेरठ पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया के माध्यम से ठगी का शिकार हुआ है, तो वह तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराए। समय रहते सूचना देने पर कई मामलों में धनराशि को रोका या रिकवर किया जा सकता है। निष्कर्ष थाना मुण्डाली पुलिस और साइबर सेल की इस संयुक्त कार्रवाई से स्पष्ट है कि साइबर अपराधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। तकनीकी संसाधनों और डिजिटल सर्विलांस के माध्यम से पुलिस ऐसे गिरोहों का पर्दाफाश कर रही है। चार आरोपियों की गिरफ्तारी से एक संगठित ठगी नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसने सोशल मीडिया को हथियार बनाकर देशभर के लोगों को निशाना बनाया। पुलिस की कार्रवाई से न केवल पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है, बल्कि साइबर अपराधियों को भी कड़ा संदेश गया है कि कानून के हाथ लंबे हैं और डिजिटल दुनिया में भी अपराध छिप नहीं सकता!