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जूता छुपाई (Joota Chupai) रस्म का इतिहास और महत्व जूता छुपाई या जूता चुराई भारतीय शादियों (खासकर हिंदू विवाह) की एक बहुत लोकप्रिय और मजेदार रस्म है, जिसमें दुल्हन की बहनें, चचेरी बहनें या सखियाँ दूल्हे के जूते चुराकर छिपा लेती हैं। फेरों के बाद या विदाई से पहले दूल्हे को जूते वापस पाने के लिए नेग (पैसे, तोहफे या मजे वाली मोलभाव) देना पड़ता है। यह रस्म हंसी-मजाक, परिवारों के बीच हल्की-फुल्की नोक-झोंक और खुशी का माहौल बनाती है। इस रस्म की शुरुआत और उसका इतिहास कुछ प्रमुख मान्यताएँ और सिद्धांत: रामायण से जुड़ी लोककथा: सबसे ज्यादा प्रचलित कहानी यह है कि राम-सीता विवाह के समय सीता जी की सखियों ने भगवान राम के जूते (या पादुकाएँ) छिपाए थे। फेरों के बाद जब राम जी को पादुकाएँ लौटाई गईं, तो उन्होंने प्रसन्न होकर सखियों को उपहार दिए। इसी से यह परंपरा शुरू हुई मानी जाती है।