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"कबीर तास मिलाइ" संत कबीर दास जी का गहन और अत्यंत शिक्षाप्रद भजन/दोहा है। इस अमर वाणी में कबीर जी ने सच्चे साधक, गुरु की शरण और नाम‑भक्ति का महत्व स्पष्ट किया है। वे कहते हैं कि कबीर उसी से मिलते हैं, जो भीतर से शुद्ध है, जिसने मोह‑माया का त्याग किया है और जो सतनाम को ह्रदय में धारण करता है। इस भजन का भाव है – "कबीर तास मिलाइ" अर्थात कबीर उसी साधक से मिलते हैं, जो सच्चे मार्ग पर चलता है। केवल बाहरी कर्मकांड और आडंबर से आत्मा को परमात्मा से जोड़ना संभव नहीं है। कबीर जी हमें यह सिखाते हैं कि गुरु की शरण और नाम‑स्मरण ही वह मार्ग है जो जीव को सच्ची मुक्ति और शांति प्रदान करता है। 🌿 भजन/दोहा का आध्यात्मिक संदेश सच्चे साधक का महत्व: कबीर उसी से मिलते हैं, जो भीतर से शुद्ध है। मोह‑माया का त्याग: सांसारिक सुख और आडंबर क्षणिक हैं, केवल भक्ति शाश्वत है। गुरु का मार्गदर्शन: गुरु ही वह शक्ति हैं जो जीव को सही मार्ग दिखाते हैं। सच्ची साधना: नाम‑स्मरण और ध्यान ही आत्मा को शुद्ध करते हैं और परमात्मा से जोड़ते हैं। जीवन का उद्देश्य: आत्मा को परमात्मा से जोड़ना ही साधना का सार है। 🎶 भावनात्मक प्रभाव यह भजन सुनते समय श्रोता को गहरी आत्मिक जागृति और जीवन के सत्य की अनुभूति होती है। कबीर जी की वाणी हमें यह याद दिलाती है कि सच्चा साधक वही है, जो भीतर से शुद्ध है और गुरु की शरण में रहकर नाम‑स्मरण करता है 🌟 निष्कर्ष "कबीर तास मिलाइ" केवल एक भजन नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन है। कबीर जी की वाणी हमें यह सिखाती है कि सच्चा साधक वही है, जो भीतर से शुद्ध है और गुरु की शरण में रहकर नाम‑स्मरण करता है। गुरु की कृपा और सतनाम ही वह मार्ग है जो जीव को सच्ची मुक्ति और शांति प्रदान करता है। यह भजन हर उस व्यक्ति के लिए है जो आत्मिक शांति, भक्ति और सत्य की खोज में है