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राजस्थान के पावन गणगौर पर्व पर समर्पित यह सुंदर भजन ईसर जी और माता गौरा की महिमा का वर्णन करता है। इस भजन में गणगौर माता की पूजा, सुहागिनों की श्रद्धा और ईसर-गौरा के दिव्य मिलन का भाव प्रकट किया गया है। भजन की पंक्तियाँ: ईसर जी आवे रे, गौरां संग आवे, गणगौर मात री ज्योत जगावे। ढोल नगाड़ा बाजे आंगण में, म्हारा ईसर-गौर घर पधारावे॥ गौरां रा माथे चंदन चमके, ईसर जी रो तेज उजास, रंग बिरंगी चुनरी लहरावे, म्हारे घर आई गणगौर खास॥ ईसर जी आवे रे, गौरां संग आवे, गणगौर मात री ज्योत जगावे। गोरां थारी चाल निराली, ईसर जी थारो रूप महान, भक्तां रो दुख दूर करांसा, देजो सुख री वरदान॥ थाळ सजावां फूलां री माला, दीप जलावां प्रेम अपार, ईसर-गौर ने वंदन करूं मैं, राखजो म्हारो संसार॥ ईसर जी आवे रे, गौरां संग आवे, गणगौर मात री ज्योत जगावे। घूमर खेले गोरां सुंदर, नाचे सखियां रंग रंगील, ढोलक बाजे ताल सुहाणी, गूंजे मंगल गीत रसील॥ कैलाश सूं आज पधार्या, ईसर जी गौरां संग आय, म्हारा आंगण भाग जग्या रे, मंगल घड़ी आज आई॥ ईसर जी आवे रे, गौरां संग आवे, गणगौर मात री ज्योत जगावे। हाथ जोड़ूं विनती करूं मैं, सुनजो ईसर महाराज, गौरां माता कृपा बरसाओ, राखजो भक्तां री लाज॥ गणगौर रा दिन पावन लागे, मंगल गीतां री झंकार, सुख-समृद्धि घर में आवे, ईसर-गौर थारो उपकार॥ ईसर जी आवे रे, गौरां संग आवे, गणगौर मात री ज्योत जगावे। नदी किनारे माटी ल्यावां, गौरां री मूर्ति बनावां, फूलां री सेज सजावां, भक्ति रो दीप जलावां॥ सोलह श्रृंगार करे गोरां, चूड़ी कंगन माथे बिंदिया, ईसर जी देखे प्रेम भरी नैणां, झलके भक्तां री प्रीतिया॥ ईसर जी आवे रे, गौरां संग आवे, गणगौर मात री ज्योत जगावे। माथे मोर मुकुट सजावे, ईसर जी रो रूप अनूप, गौरां साथे विराजे प्यारा, देखे जग सारा स्वरूप॥ घूघट में गौरां मुस्कावे, ईसर जी ने देखे प्यार, भक्तां रो मन हरखायो, छायो मंगल अपार॥ ईसर जी आवे रे, गौरां संग आवे, गणगौर मात री ज्योत जगावे। ढोल नगाड़ा बाजे भारी, नाचे सारा गाँव, ईसर-गौर ने देखन खातिर, लाग्यो भक्तां रो ठाँव॥ माटी री खुशबू में रमता, गौरां रो रूप सुहावो, ईसर जी साथे आवे, भाग्य म्हारो जगावो॥ ईसर जी आवे रे, गौरां संग आवे, गणगौर मात री ज्योत जगावे। थाळ में दीपक जगमगावे, फूलां री खुशबू चारों ओर, ईसर-गौर री कृपा बरसे, भर दे जीवन में भोर॥ सखी सहेली गीत सुनावे, गणगौर री महिमा गावे, ईसर-गौर ने वंदन करके, सुख-समृद्धि घर लावे॥ ईसर जी आवे रे, गौरां संग आवे, गणगौर मात री ज्योत जगावे। म्हारा आंगण आज सजे रे, फूलां री छाई बहार, ईसर-गौर पधार्या घर में, मंगल भयो अपार॥ घूमर घाले सखियां सारी, रंगीलो रैग गूंजे, ईसर-गौर री महिमा गाते, भक्तां रो मन सूंझे॥ ईसर जी आवे रे, गौरां संग आवे, गणगौर मात री ज्योत जगावे। गौरां माता दया की सागर, ईसर जी महादेव, भक्तां रो कष्ट मिटावो, राखजो सदा सेव॥ ईसर जी आवे रे, गौरां संग आवे, गणगौर मात री ज्योत जगावे। कुंडल झूले कानां में, माथे चंदन रो तिलक, ईसर-गौर री जोड़ी न्यारी, देखे भक्तां रो मन खिलक॥ थाळ सजावां रोली चंदन, फूलां री माला लावां, ईसर-गौर ने शीश नवावां, मन री आस जगावां॥ ईसर जी आवे रे, गौरां संग आवे, गणगौर मात री ज्योत जगावे। गौरां माता वर देजो, सुख-समृद्धि घर आवे, ईसर जी साथे थारी कृपा, भक्तां रो जीवन सवारे॥ सजधज के आई गणगौर, गूंजे मंगल धुन, ईसर-गौर री महिमा गाते, भक्तां रो हरषे मन॥ ईसर जी आवे रे, गौरां संग आवे, गणगौर मात री ज्योत जगावे। सखियां साथे गीत गावे, गणगौर री महिमा न्यारी, ईसर-गौर ने वंदन करके, कटे जीवन री बीमारी॥ माथे चाँद सी ज्योत चमके, गौरां रो रूप निरालो, ईसर जी साथे विराजे, भाग्य म्हारो उजालो॥ ईसर जी आवे रे, गौरां संग आवे, गणगौर मात री ज्योत जगावे। ढोलक बाजे थाप सुहाणी, नाचे सारा गाँव, ईसर-गौर ने देखन खातिर, लागे भक्तां रो ठाँव॥ फूलां री वर्षा होवे, मंगल गीत गूंजे, ईसर-गौर री कृपा बरसे, सुख री धारा पूजे॥ ईसर जी आवे रे, गौरां संग आवे, गणगौर मात री ज्योत जगावे। सिंदूर लाल सुहाग रो, गौरां माथे चमके, ईसर जी साथे प्रेम निरालो, भक्तां रो मन दमके॥ दीपक ज्योत जगमगावे, भक्ति रो सागर बहावे, ईसर-गौर री महिमा गाते, सुख-समृद्धि घर आवे॥ थारी महिमा अपरंपार, ईसर-गौर महाराज, भक्तां रो जीवन सवारो, राखजो सबकी लाज॥ ईसर जी आवे रे, गौरां संग आवे, गणगौर मात री ज्योत जगावे। ईसर जी आवे रे गौरां संग आवे, गणगौर मात री ज्योत जगावे, ढोल नगाड़ा बाजे आंगण में, म्हारा ईसर-गौर घर पधारावे॥ गणगौर का यह पावन पर्व माता पार्वती (गौरा) और भगवान शिव (ईसर) के प्रेम और आशीर्वाद का प्रतीक है। यदि आपको यह भजन पसंद आए तो Like, Share और Channel Subscribe जरूर करें और कमेंट में लिखें “जय गणगौर माता” 🙏