У нас вы можете посмотреть бесплатно Humne Apni Maa Ko Maar Diya | Behti Hui Cheekh | River Truth Rap или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
HUMNE APNI MAA KO MAAR DIYA © Copyright – FlickVerse by Gaurav All rights reserved. Unauthorized reproduction or re-upload is prohibited. Lyrics:- आज हम आपको बताने जा रहे हैं उन maaon ki dardbhari kahani jinhone is desh ko paala hai. Jinke aanchal se khet hare hue, jinke paani se shehar base, aur jinke kinaaron par poori sabhyata ne janm liya. Ye kahani un maaon ki hai jinke naam hain— Ganga, Yamuna, Damodar aur Gomti. Ye kahani mandiron ki nahi, ye kahani naaron ki nahi. Ye kahani hai un maaon ki jo sadiyon se chup hain, lekin aaj… bol rahi hain. Aaiye sunte hain us maa ki zubaani— 🎶 LYRICS सदियों से बह रही हूँ, आज पहली बार बोल रही हूँ। मैंने पानी दिया, तुमने ज़हर दिया मैंने जीवन दिया, तुमने कहर दिया माँ कहकर पूजा हर एक दिन फिर मेरी ही गोद में कूड़ा क्यों भर दिया? मैं पहाड़ों से उतरी थी, निर्मल, साफ़ तेरी प्यास बनी, तेरा हर एक ख़्वाब तेरे खेतों को सींचा, तेरे घर को बचाया कभी जात नहीं पूछी, सबको बराबर लुटाया मैंने बदले में कभी कुछ माँगा नहीं ना सत्ता, ना पैसा, ना कोई तख़्त पर आज मेरे जिस्म में बह रहा है लोहा, ज़हर, एसिड—ये कैसा है मेरा हश्र? मैंने पानी दिया, तुमने ज़हर दिया मैंने जीवन दिया, तुमने कहर दिया माँ कहकर पूजा हर एक दिन फिर मेरी ही गोद में कूड़ा क्यों भर दिया? मेरे भीतर अब मछलियाँ डरती हैं पंछी उतरते नहीं, साँसें घुटती हैं तेरा बच्चा वही पानी पीता है जिसमें तू खुद गंदगी घोलता है आज मुफ्त हूँ, इसलिए क़दर नहीं कल बोतल में बिकूँगी, तब भी सबको नहीं उस दिन तू कहेगा—“पानी बहुत महँगा है” पर उस दिन भी ग़रीब का गला सूखा ही रहेगा घाट पर दीप, फूल और मंत्र पीछे खुला पाइप—पूरा ज़हर तंत्र तू कहे पवित्र, पर कर्म अपवित्र मैं माँ हूँ तेरी—ये कैसा है तेरा चरित्र? मेरी लाश में उतरकर पाप भी धोना है और मेरे मरने पर मुँह फेरकर सोना है माँ कहकर मारना बंद कर श्रद्धा नहीं, ज़िम्मेदारी समझ मैं बहती रही, तू चुप रहा अब पूछता है—ये हालत कैसे बनी, समझ? मेरी हालत तेरी आदत है सड़क पर थूक, हाथ में कूड़ा— फिर बोले, “सिस्टम की ग़लत है” दो रुपये गिरें तो झुक जाता है पर मैं गिर रही हूँ—तो नज़र हटाता है जिस दिन तेरे घर का नल तेरे बच्चे को ज़हर पिलाएगा हर पल मैंने तुझे प्यास से बचाया तूने मुझे मरने दिया मैंने हर युग में तेरा साथ निभाया तूने अपने समय में मुँह मोड़ लिया याद रख— मैं सूखी, तो शहर मरेंगे मैं ज़हरीली, तो नस्लें सड़ेंगी ये लड़ाई सरकार की नहीं ये मुद्दा किसी पार्टी का नहीं ये सवाल तुझसे है, इंसान— क्या तू अपनी माँ को बचाएगा या उसकी मौत पर भी कहेगा “मेरा इससे क्या लेना?” मैं नदी हूँ… आज भी बह रही हूँ। पर अगर तू नहीं बदला— कल तुझ तक पहुँचना मेरे बस में नहीं होगा। अब बोल— क्या तू सुनेगा? या फिर बहता पानी सिर्फ़ याद बन जाएगा?