У нас вы можете посмотреть бесплатно अल्लाह तआला ने लड़कियों को ऊँचा दर्जा दिया है माँ-बाप की खिदमत कैसे करें? दिल को छू लेने वाला बयान или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम प्यारे भाइयों और बहनों, आज का यह इस्लामी बयान एक बहुत ही अहम और जरूरी विषय पर है। इस वीडियो में बताया गया है कि इस्लाम में लड़कियों को कितना ऊँचा दर्जा दिया गया है और साथ ही यह भी बताया गया है कि मुसलमान को अपने माँ-बाप की खिदमत किस तरह करनी चाहिए। इस बयान में मौलाना जर्जिस अंसारी बहुत ही खूबसूरत अंदाज़ में कुरआन और हदीस की रोशनी में समझाते हैं कि एक सच्चा मुसलमान कैसा होना चाहिए और उसे अपनी जिंदगी इस्लामी तरीके से कैसे गुजारनी चाहिए। आज के दौर में बहुत से लोग दुनिया की भागदौड़ में अपने माँ-बाप के हक़ भूल जाते हैं। लेकिन इस्लाम हमें सिखाता है कि माँ-बाप की खिदमत करना सबसे बड़ी इबादतों में से एक है। अगर कोई मुसलमान अल्लाह को राज़ी करना चाहता है, तो उसे अपने माँ-बाप की सेवा करनी होगी और बेटियों को इज्जत देनी होगी। इस्लाम आने से पहले अरब समाज में लड़कियों को बहुत कम महत्व दिया जाता था। कई लोग बेटियों के पैदा होने पर दुखी होते थे। लेकिन जब इस्लाम आया तो अल्लाह तआला ने बेटियों को बहुत ऊँचा दर्जा दिया। पैगंबर Muhammad ﷺ ने फरमाया: जिस व्यक्ति के पास बेटियाँ हों और वह उन्हें अच्छी तरह पाल-पोस कर बड़ा करे, उन्हें अच्छी तालीम दे और अच्छे तरीके से उनकी शादी करे, तो अल्लाह उसे जन्नत देगा। इससे पता चलता है कि बेटियाँ अल्लाह की रहमत होती हैं। इस्लाम का इतिहास बताता है कि अल्लाह के रसूल ﷺ ने हमेशा बेटियों और औरतों को इज्जत दी। पैगंबर ﷺ अपनी बेटी Fatimah से बहुत मोहब्बत करते थे। जब वह उनके पास आती थीं तो रसूल ﷺ खड़े होकर उनका स्वागत करते थे और उन्हें अपने पास बैठाते थे। यह हमें सिखाता है कि बेटियों के साथ प्यार और सम्मान से पेश आना चाहिए। इस्लाम में माँ-बाप की सेवा करना बहुत बड़ा काम है। कुरआन में अल्लाह तआला फरमाता है कि: अल्लाह की इबादत करो और उसके साथ किसी को शरीक न करो और माँ-बाप के साथ अच्छा व्यवहार करो। माँ-बाप की सेवा करना सिर्फ एक फर्ज नहीं बल्कि बहुत बड़ी नेकी है। हदीस शरीफ में आता है कि एक सहाबी ने पैगंबर ﷺ से पूछा: सबसे ज्यादा अच्छे व्यवहार का हकदार कौन है? रसूल ﷺ ने फरमाया: पहले तुम्हारी माँ फिर तुम्हारी माँ फिर तुम्हारी माँ फिर तुम्हारे पिता इससे पता चलता है कि इस्लाम में माँ का दर्जा बहुत ऊँचा है। माँ के बाद पिता का भी बहुत बड़ा दर्जा है। पिता अपने बच्चों की परवरिश के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। इसलिए हर बच्चे का फर्ज है कि वह अपने पिता की इज्जत करे और उनकी बात माने। एक सच्चे मुसलमान को अपनी जिंदगी इस तरह गुजारनी चाहिए: ✔ पाँच वक्त की नमाज़ पढ़ना ✔ कुरआन की तिलावत करना ✔ सच्चाई बोलना ✔ गरीबों की मदद करना ✔ माँ-बाप की सेवा करना ✔ बुरे कामों से बचना अगर कोई इंसान इन बातों पर अमल करता है तो वह अल्लाह के करीब हो जाता है। इस्लाम में माँ-बाप की नाफरमानी बहुत बड़ा गुनाह माना गया है। जो व्यक्ति अपने माँ-बाप को दुख देता है या उनकी बात नहीं मानता, वह अल्लाह की नाराज़गी का हकदार बन जाता है। इसलिए हमें हमेशा अपने माँ-बाप के साथ नरमी और मोहब्बत से पेश आना चाहिए। इस्लाम हमें सिखाता है कि बेटियों को अच्छी तालीम दें, उन्हें अच्छे संस्कार दें और उनकी इज्जत करें। बेटियाँ घर की रहमत होती हैं और उनके कारण घर में बरकत आती है। इस बयान से हमें बहुत बड़ी सीख मिलती है: 1️⃣ बेटियों की इज्जत करें 2️⃣ माँ-बाप की खिदमत करें 3️⃣ इस्लामी तरीके से जिंदगी जिएं 4️⃣ अल्लाह से डरें 5️⃣ अच्छे काम करें अगर हर मुसलमान इन बातों पर अमल करे तो समाज में मोहब्बत और भाईचारा बढ़ेगा। इस्लाम हमें इंसानियत, रहमत और सम्मान का पैगाम देता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने माँ-बाप की सेवा करें, बेटियों की इज्जत करें और इस्लाम के बताए हुए रास्ते पर चलें। ✔ वीडियो को Like करें ✔ अपने दोस्तों के साथ Share करें ✔ और ऐसे ही इस्लामी बयान सुनने के लिए Channel Subscribe करें #IslamicBayan #MaulanaJargisAnsari #IslamicSpeech #IslamicKnowledge #IslamicReminder #IslamicMotivation #MuslimLife #QuranHadith #IslamicEducation #IslamicVideo #IslamicHistory #DeenKiBaat #MuslimUmmah #IslamicWaz #IslamicMessage