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भारतीय शास्त्रीय संगीत में ताल और स्वर का संतुलन अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि साधक सही ताल, सही लय और सही स्वर में नियमित अभ्यास करे, तो उसका गायन और वादन दोनों ही सुरीले और सशक्त बनते हैं। दादरा ताल (६ मात्राएँ) हल्की-फुल्की, मधुर और भावप्रधान रचनाओं के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है। जब इसका अभ्यास G# (ग़ी#) स्केल के तानपुरा और तबला के साथ किया जाता है, तो स्वर स्थिरता और लयबद्धता दोनों का सुंदर समन्वय विकसित होता है। 1. दादरा ताल का परिचय Dadra Tala भारतीय शास्त्रीय और उपशास्त्रीय संगीत में प्रचलित ६ मात्राओं की ताल है। इसका विभाजन 3 + 3 मात्राओं में होता है। थेका: धा धि ना | ता ति ना या धा धा ति ना | ता ति ना सम: पहली मात्रा (धा) ताली: 1 पर खाली: 4 पर दादरा ताल का प्रयोग प्रायः ठुमरी, दादरा, भजन, ग़ज़ल और हल्की रचनाओं में होता है। यह ताल सरल होने के बावजूद भावों की अभिव्यक्ति के लिए अत्यंत प्रभावी है। 2. G# स्केल तानपुरा का महत्व जब आप G# स्केल में तानपुरा लगाते हैं, तो आपका ‘सा’ G# पर स्थिर होता है। तानपुरा निरंतर ‘सा-पा-सा-सा’ या ‘सा-म-सा-सा’ की ध्वनि देता है, जिससे साधक का स्वर केंद्रित रहता है। G# स्केल में स्वर क्रम (यदि सा = G#): सा – रे – ग – म – प – ध – नि – सा नियमित रूप से G# तानपुरा के साथ अभ्यास करने से: स्वर शुद्धता बढ़ती है सुर पकड़ मजबूत होती है ऊँचे और मध्यम सप्तक में नियंत्रण आता है गले में स्थिरता आती है 3. अभ्यास प्रारंभ करने की विधि (1) प्रारंभिक तैयारी शांत वातावरण चुनें तानपुरा G# पर सेट करें तबला को दादरा ताल में 60–80 BPM पर रखें 5 मिनट गहरी श्वास लेकर मन को शांत करें (2) सरगम अभ्यास तानपुरा के साथ पहले बिना ताल के केवल स्वर अभ्यास करें: सा रे ग म | प ध नि सा सा नि ध प | म ग रे सा धीमी लय में 10–15 मिनट तक अभ्यास करें। 4. दादरा ताल में स्वर अभ्यास अब तबला जोड़ें और दादरा ताल में सरल सरगम गाएँ: उदाहरण 1: सा रे ग | म प ध नि सा नि | ध प म हर 6 मात्राओं में वाक्य पूरा करने का अभ्यास करें। उदाहरण 2 (लयकारी अभ्यास): सा रे ग म प ध | नि सा नि ध प म पहले विलंबित, फिर मध्यम और अंत में द्रुत लय में अभ्यास करें। 5. बोल-आलाप अभ्यास दादरा ताल भाव प्रधान है, इसलिए बोल-आलाप का अभ्यास आवश्यक है। उदाहरण (काल्पनिक बंदिश): “मोरे मन बसो श्याम” धा धि ना | ता ति ना मो रे मन | बसो श्याम सम पर शब्द का विशेष ध्यान रखें खाली (4th मात्रा) पर हल्का उतार दें भाव के साथ गाएँ 6. तान अभ्यास G# स्केल में सरल तानें: सा रे ग, रे ग म, ग म प म प ध, प ध नि, ध नि सा सा नि ध प म ग रे सा दादरा ताल में तान गाते समय ध्यान रखें: तान 6 मात्राओं में पूरी हो सम पर आकर समाप्त हो लय न टूटे 7. तबला के साथ समन्वय तबला और तानपुरा दोनों के साथ अभ्यास करने से: लय की समझ बढ़ती है ताल का आभास स्पष्ट होता है गायन में आत्मविश्वास आता है तबला के बोलों को मन में दोहराएँ: धा धि ना | ता ति ना हर बार सम पर सटीक उतरने का प्रयास करें। 8. अलंकार अभ्यास G# स्केल में अलंकार दादरा ताल में गाएँ: सा रे सा रे | ग म ग म प ध प ध | नि सा नि सा सा ग रे म | ग प म ध धीमी लय में शुद्धता पर ध्यान दें, फिर गति बढ़ाएँ। 9. भाव और अभिव्यक्ति दादरा ताल का स्वभाव कोमल और भावुक है। अतः: मींड का प्रयोग करें हल्की मुरकी दें शब्दों की स्पष्टता रखें यदि आप भजन या ठुमरी का अभ्यास कर रहे हैं, तो भाव प्रधान गायन करें। 10. नियमित अभ्यास का महत्व प्रतिदिन कम से कम 45–60 मिनट G# तानपुरा और दादरा ताल में अभ्यास करें: 10 मिनट – शुद्ध स्वर 15 मिनट – सरगम और अलंकार 15 मिनट – बंदिश अभ्यास 10 मिनट – तान और बोल-आलाप लगातार अभ्यास से: स्वर स्थिरता बढ़ेगी ताल की पकड़ मजबूत होगी रचनाओं में मधुरता आएगी मंच प्रस्तुति में आत्मविश्वास बढ़ेगा 11. सावधानियाँ गले पर ज़ोर न डालें ऊँचे स्वर में धीरे-धीरे जाएँ पानी पीते रहें अभ्यास से पहले हल्का रियाज़ अवश्य करें निष्कर्ष दादरा ताल में G# स्केल तानपुरा और तबला के साथ अभ्यास करना संगीत साधना का एक संतुलित और प्रभावी तरीका है। यह स्वर और ताल दोनों को मजबूत करता है। नियमित अभ्यास, सही लय और सम पर सटीक आगमन आपकी गायकी को निखार देगा। यदि साधक धैर्य, समर्पण और नियमितता के साथ अभ्यास करे, तो दादरा ताल में उसकी प्रस्तुति अत्यंत मधुर और प्रभावशाली बन सकती है। #Riyaz #IndianClassicalMusic #Tanpura #Tabla #SangeetSadhana #RaagPractice #VocalPractice #MusicStudent #DailyRiyaz #ClassicalSinging