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Ramesh Balsekar full talk Ramesh Balsekar discusses the nature of meditation, enlightenment, and happiness, emphasizing that true happiness is distinct from pleasure. He critiques spiritual seekers for not questioning what they expect from enlightenment. He highlights the importance of understanding the ego's role in daily life, ultimately advocating for the pursuit of genuine happiness over mere pleasure. रामेश बालसेकर ने ध्यान और आत्मज्ञान के विषय में गहन चर्चा की। उन्होंने बताया कि ध्यान केवल एक साधन है, लेकिन असली ज्ञान तब आता है जब व्यक्ति अपने अस्तित्व की वास्तविकता को समझता है। आत्मज्ञान की खोज में, व्यक्ति को यह जानना चाहिए कि वह क्या चाहता है और उसके अनुभव क्या हैं। खुशी और सुख में एक बुनियादी अंतर है, हालांकि दोनों शब्द अक्सर interchangeably उपयोग किए जाते हैं: खुशी (Happiness): खुशी एक भावनात्मक अवस्था है, जो अक्सर बाहरी कारणों से उत्पन्न होती है। यह क्षणिक होती है और विभिन्न परिस्थितियों या घटनाओं के आधार पर बदल सकती है, जैसे किसी दोस्त से मिलना, किसी खास अवसर को मनाना, या कोई नई चीज पाना। खुशी का अनुभव अक्सर एक सुखद और सकारात्मक भावना के रूप में किया जाता है, लेकिन यह स्थायी नहीं होती। सुख (Joy or Contentment): सुख एक गहरी और स्थायी अवस्था है। यह आंतरिक संतोष और जीवन के प्रति एक समग्र आनंद का अनुभव है। सुख आमतौर पर आत्मा की गहराई में होता है और बाहरी परिस्थितियों से कम प्रभावित होता है। सुख को अक्सर जीवन के उद्देश्य, संबंधों और आंतरिक शांति से जोड़ा जाता है। यह एक स्थायी स्थिति हो सकती है, जो व्यक्ति के भीतर से आती है। संक्षेप में, खुशी क्षणिक और बाहरी कारणों से प्रेरित होती है, जबकि सुख एक गहरी और स्थायी आंतरिक अनुभूति है।