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संत रविदास जी की महिमा ! सार्वजनिक उत्सव करकेडी 2026 #santravidaas #ravidaasjayanti2026 @Dkkarkeri . आज हम याद कर रहे हैं एक ऐसे महान संत को, जिन्होंने समाज को प्रेम, समानता और इंसानियत का रास्ता दिखाया — संत गुरु रविदास जी। संत रविदास जी का जन्म लगभग 1450 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर वाराणसी में हुआ था। वे एक साधारण परिवार में जन्मे थे, लेकिन उनके विचार असाधारण थे। बचपन से ही उनके मन में भक्ति, करुणा और सच्चाई बसती थी। वे मानते थे कि भगवान मंदिरों में नहीं, बल्कि हर इंसान के दिल में बसते हैं। उस समय समाज जाति-भेद से बंटा हुआ था, लेकिन संत रविदास ने खुलकर इसका विरोध किया। उन्होंने कहा — “मन चंगा तो कठौती में गंगा।” यानी अगर मन पवित्र है, तो हर जगह भगवान का वास है। उनकी वाणी में दर्द भी था और उम्मीद भी। उनके भजन सीधे दिल को छू जाते थे। उन्होंने सिखाया कि हर इंसान बराबर है — चाहे गरीब हो या अमीर। संत रविदास भक्ति आंदोलन के महान संतों में से एक थे। मीरा बाई भी उनकी शिष्या मानी जाती हैं। उनकी शिक्षाओं ने लाखों लोगों को नई सोच दी। उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि नफरत नहीं, प्रेम फैलाओ। भेदभाव नहीं, भाईचारा अपनाओ। अहंकार नहीं, सेवा करो। संत रविदास का सपना था — एक ऐसा समाज जहाँ कोई ऊँचा-नीचा न हो, जहाँ सब इंसान एक समान हों। आज संत रविदास जयंती हमें याद दिलाती है कि सच्ची भक्ति वही है जो इंसान को इंसान से जोड़े। उनका जीवन हमें सिखाता है कि हालात चाहे जैसे हों, अगर इरादे नेक हों तो बदलाव जरूर आता है। संत रविदास सिर्फ एक संत नहीं थे, वे एक समाज सुधारक थे, एक रोशनी थे अंधेरे समय में। आइए, इस रविदास जयंती पर हम भी संकल्प लें — प्रेम फैलाने का, सम्मान देने का और इंसानियत को सबसे ऊपर रखने का। जय संत रविदास जी 🙏 .