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संघ की स्थापना के 100 वर्ष पर व्याख्यानमाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में यहां लाला सीताराम गोयल की स्मृति में आयोजित व्याख्यानमाला 75.0 में देशभर के वरिष्ठ संघ नेताओं के महाकुंभ में विविध मुद्दों, उपलब्धियों, चुनौतियों पर गहन मंथन हुआ। 20 से अधिक वक्ताओं ने उपस्थित सभी लोगों को आठ घंटे तक प्रभावशाली शैली-शब्दावली व उदाहरणों से बांधे रखा। सौ साल पहले डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने संघ की स्थापना क्यों की, सौ साल में कितनी कठिनाइयां झेलीं, कितने पड़ाव पार किए, संघ कैसे हिंदुत्व के लिए संजीवनी बना, संघ और हिंदुत्व के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती क्या है? इन मुद्दों पर वक्ताओं ने विस्तार से अपनी बात कही। व्याख्यानमाला के मुख्य वक्ता भाजपा के प्रमुख रणनीतिकार व पार्टी के आंध्र प्रदेश के सह प्रभारी सुनील विश्वनाथ देवघर ने संघ के सौ साल का संघर्षपूर्ण सफरनामा पेश करते हुए कहा कि बड़ी चुनौतियां आज भी सामने हैं। उन्होंने कहा, 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' मिशन का वर्तमान संदर्भ में अर्थ है बेटियों को लव जेहादियों से बचाना, हिंदू लड़कियों को अपने जाल में फंसाने वालों की मंशा का भंडाफोड़ करना, सबक सिखाना। उन्होंने कहा कि हर हिन्दू महिला को तीन बच्चे पैदा करने चाहिए, नहीं तो हिन्दू घटते जाएंगे। जो घटेगा वहीं कटेगा। पूर्वोत्तर राज्यों में भाजपा के विस्तार में उनकी भूमिका बेहद खास मानी जाती है। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ संत स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि कुछ संगठन अपने लिए नहीं बल्कि दूसरों के लिए बनते हैं, यही आरएसएस का मूलमंत्र है। अंधविश्वास से विश्वास की ओर ले जाता है संघ। संघ की यात्रा संस्कार की यात्रा है। उन्होंने कहा, 'धन्य है आरएसएस का संग,बदल देता है जीवन का रंग।' डॉ हेडगेवार से लेकर मोहन भागवत तक का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पांच लोगों से शुरू हुई यात्रा अब दुनिया भर में पहुंच चुकी। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि देश के ही कुछ लोग निगेटिव नैरेटिव बनाते हैं, विदेश जाकर भारत की छवि खराब करते हैं। उन्होंने गंगा आरती व कुंभ का विशेष जिक्र किया। गंगा आरती इनक्रेडिबल इवेंट बन गई जबकि कुंभ में करोड़ों भक्तों के आने के बाद भी प्रदूषण नहीं फैला। पद्मश्री एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता व देश की संस्कृति की दूत मालिनी अवस्थी ने कहा कि संस्कृति से ही भारत के विश्व गुरु बनने का मार्ग प्रशस्त होगा। संघ की इकाई संस्कार भारती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संघ ने कला के माध्यम से भी लोगों को साथ जोड़ कर रखा है। सब साथ चलें,साथ बढ़ें, यही संस्कृति का मूल भाव है। संस्कार भारती की थीम भी यही है। 2014 की घटना, जब कुछ कलाकारों ने जब अपने अवार्ड लौटाने शुरू कर दिए थे, तब उनका प्रतिकार करने के लिए संस्कार भारती आगे आई थी, कई बड़े कलाकार राजपत्र पर उतरे थे। इनमें विश्व मोहन भट्ट, नलिनी कमलिनी, सरोजा वैद्यनाथन, प्रियदर्शन, मधुर भंडारकर शामिल थे जिन्होंने देश की जनता को वास्तविकता से अवगत करवाया था। सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं 'पीआईएल मैन ऑफ इंडिया' के नाम से प्रसिद्ध अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि जो सनातन है, वही भारत है और वही हिंदुत्व है। उन्होंने चेतावनी दी कि घुसपैठ के कारण नौ राज्यों की डेमोग्राफी बदल चुकी है। हिंदू घट रहे हैं, हम घटेंगे तो कटेंगे। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण के लिए, लव जिहाद के लिए हिंदू बहन बेटियों का अपहरण किया जा रहा है। साल में 25 लाख लोगों की अकाल मौत हो रही है, सौ लाख एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे हो चुके, वक्फ बोर्ड के नाम पर 40 लाख एकड़ जमीन पर अवैध कब्जे हुए। उन्होंने आह्वान किया कि हिंदुओ जागो, जनप्रतिनिधियों को जगाओ, गले सड़े कानूनों और व्यवस्थाओं से मुक्ति पाओ। अशोक श्रीवास्तव (प्रमुख टेलीविजन पत्रकार एवं लेखक) ने कहा कि जरा कल्पना कीजिए कि यदि संघ न होता तो हिंदुत्व का क्या होता। अमेरिकी यूनिवर्सिटीज व तमिलनाडु की घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, सारी दुनिया ने मान लिया है कि संघ अब भारत, सनातन व हिंदुत्व का पर्यायवाची बन चुका। चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर दीप्ति धर्माणी ने संघ की सौ वर्ष की यात्रा के विभिन्न पड़ावों, उद्देश्यों, उपलब्धियों, सरोकारों को प्रस्तुत किया। संघ ने हिंदू को जगाया है, जागरुक किया है, संगठित किया है और भविष्य का दृष्टिकोण दिया है, अच्छे विश्व की परिकलपना सिखाई है। उन्होंने आशा जताई कि अगले सौ साल में ऐसा माइक्रो मैनेजमेंट बनेगा कि दुनिया हिंदुओं से प्यार करेगी। होटल क्राउन प्लाजा में आयोजित वैचारिक महाकुंभ में संघ की दिल्ली इकाई के प्रांत कार्यवाह अनिल गुप्ता (सीए), डा कौशल कांत मिश्रा, विशिष्ट अतिथि लक्ष्मी नारायण गोयल चेयरमैन (ट्रस्ट बोर्ड) एकल भारत लोक शिक्षा परिषद एवं एकल ग्रामोत्थान परिषद, विहिप नेता विजय शंकर तिवारी, पूर्व डीजीपी (तेलंगाना) जितेन्द्र गोयल आईपीएस, जगदीश मित्तल, राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय कवि संगम, लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र प्रमुख क्षेत्रीय प्रचारक डॉ. बजरंग लाल गुप्ता, गोपाल आर्य (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक) ने भी अपने संबोधन में कई विचारोत्तेजक पहलुओं को उजागर किया। कवि योगेन्द्र शर्मा (भीलवाड़ा) के काव्य पाठ से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। राजेन्द्र शर्मा (गायक-कंपोजर) ने संगीत प्रस्तुति दी। हमेशा की तरह प्रभावशाली मंच संचालन अंतरराष्ट्रीय कवि, संस्कार भारती दिल्ली के कार्यकारी अध्यक्ष व राष्ट्रीय संस्कारों को समर्पित संस्था चेतना के अध्यक्ष राजेश चेतन ने किया। कार्यक्रम के स्वागताध्यक्ष का दायित्व संजीव गोयल (सुपुत्र लाला सीताराम गोयल), अध्यक्ष एस आर चैरिटेबल ट्रस्ट