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प्रकाशितवाक्य में वर्णित नई यरूशलेम की दृष्टि से प्रेरित एक महाकाव्यात्मक और स्वर्गीय मसीही गीत। “अनंतता की भोर” एक नए आकाश और नई पृथ्वी की शुरुआत को दर्शाता है, जहाँ परमेश्वर का सिंहासन महिमा से चमकता है और मेम्ना सदा के लिए राज्य करता है। यह उपासना और आशा का एक संगीत अनुभव है जो पीड़ा के अंत और अनंतता की शुरुआत का उत्सव मनाता है। 🎵 गीत के बोल "अनंतता की भोर — नई यरूशलेम का गीत": [प्रस्तावना – कोमल और भव्य] स्वर्ग में निस्तब्धता छा गई… एक नया दिन उदय होता है, बिना छाया और दर्द के। जीवन का जल मेम्ने के सिंहासन से बहता है, और सारी सृष्टि प्रभु की महिमा के आगे झुक जाती है। [पद 1] मैंने नया आकाश और नई पृथ्वी देखी, क्योंकि पुरानी बातें बीत चुकी थीं। राजा अपने सिंहासन पर विराजमान है, प्रकाश से वस्त्र धारण किए हुए, और उसकी आवाज़, बहुत-से जलों की ध्वनि जैसी, कहती है: “देखो, मैं सब कुछ नया कर देता हूँ!” [मुखड़ा] नई यरूशलेम, वायदे का बाग़, तेरी ज्योति सिंहासन के आगे क्रिस्टल समान चमकती है। जहाँ समय अनंतता के आगे झुक जाता है, और छुड़ाए हुए गाते हैं: “पवित्र है प्रभु!” [पद 2] राष्ट्र अपनी मुकुटें लाते हैं, राजा आराधना में झुकते हैं। कोई रात्रि नहीं, क्योंकि मेम्ना ही प्रकाश है, और उसका मुख पिता की महिमा को प्रतिबिंबित करता है। प्रेम सम्पूर्ण सृष्टि पर राज्य करता है। [सेतु – स्वर्गदूतिक गान] पवित्र, पवित्र, पवित्र है प्रभु, हर आँसू पोंछ दिया गया है। अब कोई बुराई हमारे बीच नहीं रहती, क्योंकि सिंहासन धर्म और कृपा का है। [मुखड़ा – वीरतापूर्ण और विजयी] नई यरूशलेम, वाचा का नगर, तेरी स्वर्णिम सड़कें राजा का नाम गाती हैं। अल्फा और ओमेगा सदा राज्य करते हैं, और अनंत शांति कभी समाप्त नहीं होगी। [पद 3 – चिंतनशील] स्वर्गदूत काँच के समुद्र पर नृत्य करते हैं, और संत अपने हाथ स्वर्ग की ओर उठाते हैं। एक गीत तारों के मध्य गूंजता है: “मृत्यु पराजित हुई, और मसीह विश्वासयोग्य है!” [अंत – गंभीर और विजयी] सिंहासन चमकता है, ब्रह्मांड मौन हो जाता है, सृष्टि पूर्ण सामंजस्य में विश्राम करती है। तेरे प्रकाश के राज्य में, प्रभु, हम निवास करेंगे, क्योंकि नई यरूशलेम में… अनंतता प्रारंभ हो चुकी है। [अंतिम मुखड़ा – पूर्ण गान] हे नई यरूशलेम, राजा की महिमा में, तेरी महिमा जीवन है, तेरा नाम प्रेम है। मेम्ना राज्य करता है, पाप अब नहीं है, और हम सदैव गाएँगे: “पवित्र है प्रभु, पवित्र है प्रभु!”