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🏔️ नीलकंठ पर्वत नीलकंठ पर्वत उत्तराखंड के बद्रीनाथ क्षेत्र में स्थित एक अत्यंत पवित्र और सुंदर हिमालयी पर्वत है। यह पर्वत भगवान शिव से जुड़ा हुआ माना जाता है और इसका नाम “नीलकंठ” भगवान शिव के उस रूप से आया है, जब उन्होंने समुद्र मंथन के दौरान विष (हलाहल) पिया था। यह पर्वत गढ़वाल हिमालय में स्थित है और इसकी ऊँचाई लगभग 6,596 मीटर है। सूर्योदय के समय इस पर्वत पर पड़ने वाली सुनहरी रोशनी इसे और भी दिव्य बना देती है, इसलिए इसे “Garhwal Queen” भी कहा जाता है। 📍 नीलकंठ पर्वत कहाँ है? राज्य: उत्तराखंड स्थान: बद्रीनाथ धाम के पास हिमालय: गढ़वाल हिमालय निकटतम स्थान: बद्रीनाथ मंदिर ✨ नीलकंठ पर्वत की विशेषताएँ 1️⃣ धार्मिक महत्व यह पर्वत भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है और बद्रीनाथ यात्रा में इसका विशेष महत्व है। 2️⃣ अद्भुत सुंदरता सूर्योदय के समय इसकी चोटी पर पड़ने वाली रोशनी इसे स्वर्णिम (golden) बना देती है। 3️⃣ कठिन पर्वतारोहण यह पर्वत चढ़ाई के लिए बहुत कठिन माना जाता है और केवल अनुभवी पर्वतारोही ही इसे चढ़ सकते हैं। 4️⃣ प्राकृतिक दिव्यता चारों ओर बर्फ से ढका हुआ यह पर्वत आध्यात्मिक और शांत वातावरण प्रदान करता है। 5️⃣ तीर्थ यात्रा से जुड़ाव बद्रीनाथ धाम आने वाले श्रद्धालु इस पर्वत के दर्शन को बहुत शुभ मानते हैं। 🔱 धार्मिक मान्यता कहा जाता है कि समुद्र मंथन के समय जब भगवान शिव ने विष पिया, तब उनका गला नीला हो गया और इसी कारण उन्हें नीलकंठ कहा गया। उसी से प्रेरित होकर इस पर्वत का नाम नीलकंठ पर्वत पड़ा। 🕉️ संक्षेप में नीलकंठ पर्वत केवल एक हिमालयी शिखर नहीं, बल्कि भक्ति, शक्ति और प्रकृति की अद्भुत सुंदरता का प्रतीक है।