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🙏 जय श्रीकृष्ण आज हम श्रीमद्भगवद्गीता के आठवें अध्याय "अक्षर ब्रह्म योग" का पावन उपदेश सुनेंगे। इस अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण बताते हैं कि अंतिम समय में जो भी भाव और स्मरण होगा, वही हमारी अगली गति तय करेगा। इसलिए जीवन भर ईश्वर का स्मरण करना आवश्यक है। ✨ मुख्य श्लोक 📌 श्लोक 8.5 अन्तकाले च मामेव स्मरन्मुक्त्वा कलेवरम्। यः प्रयाति स मद्भावं याति नास्त्यत्र संशयः॥ 👉 अर्थ: जो व्यक्ति अंत समय में मेरा स्मरण करता हुआ शरीर त्यागता है, वह मेरे स्वरूप को प्राप्त होता है। 📌 श्लोक 8.7 तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च। 👉 संदेश: हर समय भगवान का स्मरण करते हुए अपना कर्तव्य निभाओ।