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भक्ति शिरोमणि मीराबाई द्वारा रचित यह अमर भजन ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण की पराकाष्ठा है। इस भजन में मीरा कहती हैं कि उन्होंने भगवान के 'नाम' रूपी उस अनमोल धन को पा लिया है, जिसे न तो कोई चोर चुरा सकता है और न ही समय के साथ यह कम होता है। सच्ची पूंजी: गुरु की कृपा से प्राप्त ज्ञान ही जीवन की असली पूंजी है। अक्षय धन: भौतिक सुख कम हो जाते हैं, लेकिन प्रभु का नाम दिन-प्रतिदिन बढ़ता (सवाया) जाता है। भवसागर से मुक्ति: गुरु रूपी खेवटिया (नाव चलाने वाले) के सहारे ही संसार रूपी सागर को पार किया जा सकता है। भजन (lyrics) पायो जी मैंने राम रतन धन पायो। वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, किरपा कर अपनायो॥ पायो जी मैंने... जनम-जनम की पूंजी पाई, जग में सभी गंवायो। पायो जी मैंने... खरचै नहिं कोई चोर न लेवे, दिन-दिन बढ़त सवायो। पायो जी मैंने... सत की नाव खेवटिया सतगुरु, भवसागर तर आयो। पायो जी मैंने... मीरा के प्रभु गिरधर नागर, हरख-हरख जस गायो। पायो जी मैंने राम रतन धन पायो॥ भावार्थ मीराबाई कहती हैं कि मुझे भगवान के नाम रूपी अनमोल रत्न मिल गया है। यह धन ऐसा है जिसे न तो कोई खर्च कर सकता है और न ही कोई चोर चुरा सकता है; बल्कि यह तो दिन-प्रतिदिन और बढ़ता ही जाता है। गुरु की कृपा से इस नाम रूपी नाव पर सवार होकर मैंने इस संसार रूपी सागर को पार कर लिया है। क्या आप मीराबाई के किसी अन्य भजन का अर्थ समझना चाहेंगे या उनके जीवन के बारे में जानना चाहेंगे? मीराबाई का यह भजन हमें याद दिलाता है कि संसार की भागदौड़ में हम अक्सर असली धन—'ईश्वर का नाम'—भूल जाते हैं। यह एक ऐसा खजाना है जो खर्च करने से बढ़ता है और इसे कोई छीन नहीं सकता। YOUTUBE / @hirdayke facebook - / 1dmwpyq46h INSTAGRAM / 1dmwpyq46h WHATAPP https://whatsapp.com/channel/0029Vb6q... @hirdayke #Mirabai #Bhajan #KrishnaBhakti #SpiritualQuotes #Devotion #Hinduism #Peace