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क्लोनिंग (Cloning) एक ऐसी तकनीक है जिसके द्वारा किसी जीव, कोशिका या DNA का आनुवंशिक रूप से समरूप (identical) प्रतिरूप तैयार किया जाता है। यह अलैंगिक प्रजनन (asexual reproduction) पर आधारित है, जहाँ जनक (parent) के DNA की बिल्कुल समान प्रतिलिपि बनाई जाती है। विज्ञान और तकनीक में इसके प्रमुख प्रकार हैं: क्लोनिंग के प्रकार (Types of Cloning): जीन क्लोनिंग (Gene Cloning): DNA के किसी विशिष्ट खंड या जीन की अनेक प्रतियां (copies) बनाना, जिसका उपयोग जेनेटिक इंजीनियरिंग में होता है। प्रजनन क्लोनिंग (Reproductive Cloning): इसके द्वारा संपूर्ण जीव (जैसे भेड़ डॉली) तैयार किया जाता है। इसमें सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर (SCNT) तकनीक का उपयोग होता है। थेराप्यूटिक क्लोनिंग (Therapeutic Cloning): चिकित्सा अनुसंधान हेतु मानव भ्रूण तैयार करना, जिसका उपयोग स्टेम सेल के लिए किया जा सकता है। विज्ञान और तकनीक में उपयोग (Applications in Science & Tech): कृषि (Agriculture): उच्च उपज देने वाली फसलों और पशुओं की संख्या बढ़ाने के लिए, जैसे भारत में केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान, हिसार और राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI) द्वारा भैंस के क्लोन बनाना। चिकित्सा (Medicine): आनुवंशिक बीमारियों का इलाज, अंग प्रत्यारोपण के लिए ऊतकों (tissue) का निर्माण, और नई दवाओं का परीक्षण। जैव-विविधता (Biodiversity): विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण या उनके पुनरुत्पादन में सहायक। प्रमुख चुनौतियां (Challenges): नैतिक मुद्दे (Ethical Issues): इंसानी क्लोनिंग पर व्यापक प्रतिबंध है, क्योंकि यह मानवीय मूल्यों और आनुवंशिक विविधता के विरुद्ध माना जाता है। तकनीकी सीमाएं: क्लोनिंग की प्रक्रिया काफी जटिल है, और क्लोन किए गए जीवों में स्वास्थ्य समस्याएं (जैसे समय से पहले बुढ़ापा) उत्पन्न हो सकती हैं।