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सत्संग दो अक्षरों से बना है – सत्य + संग। संग का अर्थ है जुड़ना, लेकिन प्रश्न यह है कि सत्य क्या है? जो जन्म ले और मर जाए – वह सत्य नहीं। जो बदल जाए – वह सत्य नहीं। जो सुबह से शाम और फिर रात में परिवर्तित हो जाए – वह सत्य नहीं। जो बाल्यावस्था से युवावस्था और फिर बुढ़ापे में बदल जाए – वह भी सत्य नहीं। तो फिर सत्य क्या है? सत्य वह है – जो न कभी जन्म लेता है, न कभी मरता है, जो तीनों कालों में एक समान रहता है, जिसमें कभी परिवर्तन नहीं आता। स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर, कारण शरीर — ये सत्य नहीं। वाणी की वैखरी, मध्यमा, पश्यन्ती — ये भी सत्य नहीं। रजोगुण, तमोगुण, सतोगुण — ये भी माया के गुण हैं, सत्य नहीं। जब तक हम उस सत्य को जान नहीं लेते, तब तक हम स्वयं को “सत्संगी” कैसे कह सकते हैं? सत्संग का वास्तविक अर्थ है — उस सत्य से मिलना और उसी में एक हो जाना। जैसे नमक दाल में मिलकर दाल हो जाता है, जैसे पतासा पानी में घुलकर पानी हो जाता है, जैसे तीली जलकर अग्नि बन जाती है — वैसे ही जो जीव सत्य को प्रकट कर लेता है, वह जीव नहीं रहता… वह स्वयं सत्यस्वरूप हो जाता है। ऐसे महापुरुष, जो जीव को इस जन्म-मरण के बंधन से मुक्त कर दें, जो अपने स्वरूप का दर्शन करा दें — उन्हीं को सतगुरु कहते हैं। “वस्तु कही ढूँढे कही, बता किस विधि आवे हाथ, वस्तु को जब पाइये, कोई भेदी ले ले साथ।” बंधे को बंधा मिला, छूटे कौन उपाय? सेवा कर निर्बंधन की, तने पल में देवे छुड़ाय। यह प्रवचन जीवन के सबसे गहरे प्रश्न का उत्तर है — सत्य क्या है? और उसे कैसे पाया जाए? 🕗 हर दिन सायं 8 बजे नया आध्यात्मिक प्रवचन इस चैनल पर प्रकाशित होता है। 🔔 चैनल को सब्सक्राइब करें और बेल आइकन दबाएँ ताकि आप एक भी सत्संग से वंचित न रहें। 📍 स्थान: मुक्त मणि आश्रम, बरखी खेड़ी रोड, बहबुलपुर, हिसार, हरियाणा 🙇♂️ आपका सेवक: शिव दास #Satsang #SatyaKyaHai #Satguru #SantHarpalDass #AdhyatmikGyan #SpiritualIndia #HindiPravachan #BhaktiMarg #Moksha #AtmaGyan #GyanKiBaat #SantVani #MayaKaRahasya #JeevanKaSatya #TrueSpirituality