У нас вы можете посмотреть бесплатно लिंगाष्टकम् (वनस्थ योगी श्री६श्री गुरु श्री शिवदत्त स्मारक गड्डी,जोधपुर) 9414849604 , 9829335510 или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
अथ लिङ्गाष्टकम् ब्रह्ममुरारि - सुरार्चित लिङ्गं निर्मल - भासित - शोभित - लिङ्गं । जन्मज - दुःखविनाशक - लिङ्गं , तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गं ॥१ ॥ देवमुनिप्रवरार्चित लिङ्गं कामदहं करुणाकर लिङ्गं । रावणदर्पविनाशन लिङ्गं , तत्प्रणमामिसदाशिव लिङ्गं ॥२ ॥ सर्वसुगन्धि - सुलेपित लिङ्गं , बुद्धिविवर्धन - कारण लिङ्गं । सिद्ध - सुराऽसुरवन्दित लिङ्गं , तत्प्रणमामिसदाशिव लिङ्गं ॥३ ॥ कनक - महामणि - भूषित लिङ्गं , फणिपति - वेष्टित - शोभित लिङ्गं । दक्षसुयज्ञ - विनाशक लिङ्गं , तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गं ॥४ ॥ कुंकुम - चन्दनलेपित लिङ्गं , पङ्कजहार - सुशोभित लिङ्गं । सञ्चित - पापविनाशन लिङ्गं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गं ॥५ ॥ देवगणार्चित - सेवित लिङ्गं , भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गं । दिनकरकोटि - प्रभाकर लिङ्गं , तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गं ॥६ ॥ अष्टदलोपरिवेष्टित लिङ्गं सर्वसमुद्भवकारण लिङ्गं । अष्टदरिद्र - विनाशन लिङ्गं , तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गं ॥७ ॥ सुरगुरु - सुरवर - पूजित लिङ्गं सुरवनपुष्प - सदार्चित लिङ्गं । परात्परं परमात्मक लिङ्गं , तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गं ॥८ ॥ लिङ्गाष्टकमिदंपुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ । शिवलोकमवाप्नोतिशिवेनसहमोदते॥९ ॥ ॥ इति श्री लिङ्गाष्टकस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥