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यह भजन रघुकुल की मर्यादा, वचन की पवित्रता और श्री राम की धर्मपरायण परंपरा को स्मरण करता है। राजा रघु से लेकर श्री राम तक, रघुकुल की वह अमर रीत — “प्राण जाए पर वचन न जाई” — आज भी मानवता को सत्य, त्याग और धर्म का मार्ग दिखाती है। यह भजन एक दास की वाणी है, जो अपने सद्गुरु की कृपा से श्री राम के चरणों में यह कथा अर्पित करता है। श्रवण करें, गुनगुनाएँ और अपने जीवन में धर्म को सर्वोपरि रखें। 🌸 🎶 Lyrics 🎶 चलो सुनते हैं राजा राम की महिमा इस दास से, मेरे सद्गुरु का दास हूँ मैं, श्री राम का भक्त हूँ मैं। श्री राम… जय राम… श्री राम… जय राम… हुए एक राजा महान, राजा रघु सबसे महान। दानी, योगी, महाराज, धर्म जिनका था पहचान॥ राजा नहीं, धर्म का पथ, जन-जन का वो थे अभिमान। भूखा न सोए कोई भी, न्याय जहाँ था भगवान॥ श्री राम… जय राम… श्री राम… जय राम… अश्वमेध यज्ञ पूर्ण हुआ, दान किया सब राज। सोना, भूमि, धन-वैभव, रिक्त हुआ पूरा काज॥ आए एक ऋषि द्वार पे, माँगें दान विधान। रिक्त भंडार, फिर भी राजा, वचन रहा सर्वोपरि मान॥ श्री राम… जय राम… श्री राम… जय राम… रात्रि अकेले निकले रघु, न विजय, न अभिमान। धर्म हेतु जो मिला उचित, ले आए बस उतना दान॥ ऋषि चरणों में अर्पण किया, न कहे अपना महान। तब गूँजी वाणी लोक में — रीत रघुकुल सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई॥ श्री राम… जय राम… श्री राम… जय राम… यही रीत बहती आई, पीढ़ी-पीढ़ी अविराम। सिंहासन छोड़ वन को चुना, वचन बचाने श्री राम॥ इसलिए राम रघुनंदन, रघु की मर्यादा का नाम। सुख से पहले धर्म रखा, त्याग बना उनका काम॥ श्री राम… जय राम… श्री राम… जय राम… रघु कहते — जो पास है, वो अपना नहीं, ईश्वरीय। धर्म हेतु जो त्याग सको, वही जीवन का सौंदर्य॥ महल नहीं, चरित्र बचे, यही अमर उपहार। राम में जीवित रघु आज भी, धर्म, त्याग, सत्य आधार॥ रीत रघुकुल सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई… रीत रघुकुल सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई… श्री राम… जय राम… श्री राम… जय जय राम… #ShriRam #JayShriRam #RaghuKulReet #PranJayeParVachanNaJaye #RamBhajan #BhaktiGeet #SanatanDharma #HinduBhajan #RamBhakti #Raghunandan #IndianSpirituality #DevotionalSong #BhajanLyrics #Satsang #Dharma #Tyag #Satya