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श्री माताजी के आशीर्वाद से हमने सहज कृषि की तकनीक अपनाई है। Explanation: हमने बीज और पानी को श्री माताजी के चित्र के सामने रखकर वाइब्रेट किया। यह वही तकनीक है जो श्री माताजी ने सहज योग में हमें बताई है। Demonstration: (Showing the sample) यह गेहूँ का पौधा है — देखिए इसकी जड़ें कितनी गहराई तक गई हैं, और इसका हरापन (greenery) भी बहुत अधिक है। सामान्य गेहूँ के पौधों में इतना हरापन या इतनी गहरी जड़ें नहीं होतीं। जब हमने खेत में वाइब्रेटेड पानी से सिंचाई की, तो पौधों की जड़ें मजबूत और लंबी हो गईं, और फसल देखने में भी बहुत अच्छी लगी। Summary: 👉 बीज और पानी को वाइब्रेट करने से पौधे में हरापन, मजबूती और पैदावार — तीनों में स्पष्ट वृद्धि देखी गई। 👉 यह सहज कृषि का सीधा परिणाम है, जो श्री माताजी के मार्गदर्शन से संभव हुआ। सहज कृषि में चैतन्यित जल के उपयोग के अलावा कई अन्य उपयोग भी हैं, जैसा कि वीडियो में दिखाया गया है। 1. मानव का रूपांतरण और चेतना, बपतिस्मा, धर्म: चैतन्यित जल पीने से मनुष्य के भीतर चेतना का जागरण होता है, धर्म की स्थापना होती है और यह बपतिस्मा का वास्तविक अनुभव देता है। 2. औषधि – रोगों का इलाज / एंटीबायोटिक्स: यह जल प्राकृतिक एंटीबायोटिक की तरह कार्य करता है और विभिन्न बीमारियों को ठीक करने में सहायक होता है। 3. आभूषण : आभूषणों को चैतन्यित जल में धोने से उनकी नकारात्मक ऊर्जा निकल जाती है और वे शुभ कंपन देने लगते हैं। 4. घर : घर में चैतन्यित जल का छिड़काव करने से वातावरण शुद्ध और शांतिमय हो जाता है। 5. कृत्रिम गुरु, राक्षस या भूत – मटका उपचार: मटका (पॉट) में चैतन्यित जल भरकर रखने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। 6. कृषि – गैर-हाइब्रिड बीज: चैतन्यित जल से बीज सींचने पर प्राकृतिक फसल अच्छी होती है और पौधे मजबूत बनते हैं। 7. पशु विज्ञान – दूध उत्पादन: पशुओं को यह जल पिलाने से वे स्वस्थ रहते हैं और दूध की गुणवत्ता बेहतर होती है। 8. फूल – वृद्धि और ताजगी: चैतन्यित जल से फूल अधिक समय तक ताजे और सुंदर रहते हैं। 9. कुआँ – पीने का पानी: कुओं में यह जल डालने से पानी शुद्ध हो जाता है और पीने योग्य बनता है। 10. जंगल के पेड़ – अम्ल वर्षा: पेड़ों पर चैतन्यित जल का छिड़काव करने से अम्ल वर्षा का दुष्प्रभाव कम होता है। 11. गरीबी, भौतिकवाद, पारिस्थितिक असंतुलन, अतिआधुनिकता, कट्टरवाद : चैतन्यित जल सामूहिक चेतना को संतुलित करता है जिससे इन सामाजिक समस्याओं में कमी आती है। 12. विशुद्धि चक्र उपचार, संवाद: गले पर चैतन्यित जल का प्रयोग करने से विशुद्धि चक्र संतुलित होता है और संचार क्षमता में सुधार आता है। 13. लीवर का उपचार: लीवर पर यह जल रखने या पीने से लीवर संबंधी रोगों में आराम मिलता है। 14. शारीरिक स्वास्थ्य – रोग – कैंसर, कुष्ठ रोग, एलर्जी, मायलाइटिस: यह जल इन गंभीर बीमारियों में शारीरिक कंपन को संतुलित करने में मदद करता है। 15. सेंसिबल सहजयोगी: यह जल सहजयोगियों को अधिक संवेदनशील और संतुलित बनाता है। 16. मानसिक, शारीरिक, आध्यात्मिक विकास : यह जल तीनों स्तरों पर पूर्ण विकास में सहायक है। 17. होली उत्सव: होली जैसे पर्वों में इसका प्रयोग वातावरण को पवित्र और सुरक्षित रखता है। 18. बागवानी : चैतन्यित जल से पौधे तेजी से बढ़ते हैं और स्वस्थ रहते हैं।