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🎬 एपिसोड 2 – भूरी आँखों के आँसू समय बीत चुका था। अब मनु और नन्दिनी दोनों कक्षा 10 में पहुँच गए थे। मनु अब बदल चुका था। वह नन्दिनी को न तो परेशान करता था और न ही उसके पास आने की कोशिश करता था। बस चुपके-चुपके दूर से उसे देखता रहता। नन्दिनी ने भी यह बदलाव महसूस किया था। जिसने लड़का उसे रोज़ सताया था, अब वही चुप हो गया था। लेकिन मनु का मन अब किसी और ही रास्ते पर था। वह नन्दिनी से प्यार करने लगा था। अगर एक दिन भी नन्दिनी को न देख पाता, तो बेचैन हो उठता। नन्दिनी को इस बदलाव का कारण समझ नहीं आया, मगर मनु का दिल हर बार उसके किसी और से बात करने पर जल उठता। धीरे-धीरे मनु के अंदर अपने दिल की बात कहने की बेचैनी बढ़ने लगी। उसने अपने दोस्त मोनू की गर्लफ्रेंड, खुशी से मदद मांगी। और संयोग ये था कि खुशी, नन्दिनी की अच्छी दोस्त भी थी। मनु ने कहा – “खुशी, अगर मैं नन्दिनी को न देखूँ तो बहुत बेचैन हो जाता हूँ। मैं उससे बहुत प्यार करता हूँ। तुम ही मेरी मदद कर सकती हो।” खुशी मुस्कुराई और बोली – “ठीक है, मैं नन्दिनी से बात करती हूँ।” अगले दिन जब नन्दिनी और खुशी आपस में बातें कर रही थीं, तो दूर खड़ा मनु घबराहट और उत्साह से उन्हें देख रहा था। उसका दिल बहुत तेजी से धड़क रहा था। उसे लगा, आज सबकुछ साफ़ हो जाएगा। खुशी ने धीरे से नन्दिनी से कहा – “नन्दिनी, अगर मैं तुमसे एक बात कहूँ तो तुम नाराज़ तो नहीं होगी?” नन्दिनी ने हैरान होकर जवाब दिया – “ऐसी कौन-सी बात है? बोलो।” खुशी ने गंभीर होकर कहा – “जो मनु है न, जो पहले तुम्हें बहुत परेशान करता था… दरअसल, वो तुमसे बहुत प्यार करता है।” नन्दिनी यह सुनकर चुप हो गई। कुछ पल के बाद उसने धीमे स्वर में कहा – “खुशी, मेरे पास इन सब बातों का समय नहीं है। मेरा ध्यान अभी सिर्फ़ अपनी पढ़ाई पर है।” खुशी ने उसकी आँखों में झाँका, और मुस्कुराकर चुप हो गई। लेकिन दूर खड़ा मनु, नन्दिनी के इस जवाब को कभी नहीं भूल पाया।