У нас вы можете посмотреть бесплатно श्रीमद भागवत महापुराण – स्कंध ३, अध्याय ७ : "विदुर-मैत्रेय संवाद और माया का रहस्य" или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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इस अध्याय में विदुर जी महर्षि मैत्रेय से अत्यंत गूढ़ प्रश्न पूछते हैं, जो हर आध्यात्मिक जिज्ञासु के मन में उठते हैं। विदुर जी पूछते हैं कि भगवान, जो शुद्ध चेतना (चिन्मात्र) और निर्गुण हैं, वे भौतिक गुणों और क्रियाओं से कैसे जुड़ते हैं? यदि भगवान स्वतः पूर्ण हैं, तो वे लीला करने के लिए सृष्टि की रचना क्यों करते हैं? महर्षि मैत्रेय इन प्रश्नों का उत्तर देते हुए समझाते हैं कि यह भगवान की 'माया' है, जो तर्क से परे है। जिस प्रकार स्वप्न में व्यक्ति अपना ही सिर कटता हुआ देखता है और दुख भोगता है, जबकि वास्तव में ऐसा कुछ नहीं होता, उसी प्रकार जीव अज्ञानवश शरीर के सुख-दुख को अपना मान लेता है। जैसे जल के हिलने से उसमें दिखने वाला चंद्रमा हिलता हुआ प्रतीत होता है, वैसे ही शरीर के विकारों से आत्मा कंपित होती हुई जान पड़ती है। मैत्रेय ऋषि बताते हैं कि इस भ्रम और दुख का निवारण केवल भगवान वासुदेव की भक्ति और उनकी कथा के श्रवण से ही संभव है। जब जीव भगवान के चरण-कमलों की सेवा में लीन होता है, तो सारे क्लेश वैसे ही मिट जाते हैं जैसे जागने पर स्वप्न का दुख। अध्याय के अंत में विदुर जी सृष्टि के विस्तार, विराट पुरुष, विभिन्न लोकों, मन्वन्तरों और वर्णाश्रम धर्म के विषय में और अधिक प्रश्न पूछते हैं, जिससे मैत्रेय मुनि अत्यंत प्रसन्न होकर भागवत कथा को आगे बढ़ाने के लिए तैयार होते हैं। 🪔 “भगवान की माया तर्क से परे है; केवल भक्ति द्वारा ही इस भ्रम के सागर को पार किया जा सकता है।” 🙏 Support the Seva If you like the video, please: 👍 Like 💬 Comment 🔔 Subscribe 🔗 Share this video with others searching for spiritual wisdom. Your support helps divine knowledge reach more souls. 00:00 Lecture 05:35 Discussion 19:40 Summary #श्रीमदभागवतमहापुराण #स्कंध3अध्याय7 #विदुरमैत्रेयसंवाद #माया #भक्तियोग #श्रीमद्भागवत #आत्मज्ञान #सनातनधर्म #कृष्णकथा