У нас вы можете посмотреть бесплатно श्रीमद भागवत महापुराण – स्कंध ३, अध्याय ९ : "ब्रह्मा जी की स्तुति और भगवान का अनुग्रह" или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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इस अध्याय में सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी और भगवान श्री विष्णु के बीच अत्यंत पवित्र संवाद का वर्णन है। हजारों वर्षों की तपस्या के बाद, ब्रह्मा जी को भगवान के उस दिव्य और चिन्मय स्वरूप के दर्शन होते हैं। ब्रह्मा जी स्वीकार करते हैं कि भगवान का यह रूप पंचभूतों (भौतिक तत्वों) से नहीं, बल्कि केवल ज्ञान और आनंद से बना है। ब्रह्मा जी अपनी स्तुति में कहते हैं कि जो जीव भगवान की कथा और शरण से विमुख हैं, वे भय, शोक, और लोभ की अग्नि में जलते रहते हैं। जब तक मनुष्य आपके चरण कमलों का आश्रय नहीं लेता, तब तक उसे "मैं और मेरा" का अज्ञान सताता रहता है। ब्रह्मा जी भगवान से प्रार्थना करते हैं कि सृष्टि की रचना करते समय उन्हें अभिमान न हो और वे कर्म-बंधन में न फंसें। प्रसन्न होकर भगवान, ब्रह्मा जी की उदासी को दूर करते हैं। भगवान उन्हें आश्वासन देते हैं कि यदि वे अपना मन उन (भगवान) में लगाए रखेंगे, तो रजो गुण उन्हें कभी नहीं बांध पाएगा। भगवान अंत में कहते हैं कि तपस्या और भक्ति के द्वारा ही मुझे हृदय में देखा जा सकता है। यह अध्याय साधकों को सिखाता है कि किस प्रकार कर्म करते हुए भी मन को भगवान में स्थिर रखकर हम माया के प्रभाव से बच सकते हैं। 🪔 “भगवान के चरण-कमल ही जीव के लिए एकमात्र अभय (भय-मुक्त) स्थान हैं।” 🙏 Support the Seva If you like the video, please: 👍 Like 💬 Comment 🔔 Subscribe 🔗 Share this video with others searching for spiritual wisdom. Your support helps divine knowledge reach more souls. 00:00 Lecture 05:40 Discussion 21:55 Summary #श्रीमदभागवतमहापुराण #स्कंध3अध्याय9 #ब्रह्मास्तुति #नारायण #भक्तियोग #सनातनधर्म #सृष्टिरहस्य #आध्यात्मिक