У нас вы можете посмотреть бесплатно श्रीमद भागवत महापुराण – स्कंध ३, अध्याय ६ : "विराट पुरुष का प्राकट्य और सृष्टि की रचना" или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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इस अध्याय में श्रीमद भागवत महापुराण का सृष्टि-विज्ञान अत्यंत स्पष्ट और दिव्य रूप में प्रकट होता है। महर्षि मैत्रेय विदुर को बताते हैं कि किस प्रकार भगवान की शक्ति से विराट पुरुष (Universal Form) का प्राकट्य हुआ और उसी विराट स्वरूप से समस्त सृष्टि की व्यवस्था आरंभ हुई। मैत्रेय ऋषि समझाते हैं कि विराट पुरुष कोई साधारण कल्पना नहीं, बल्कि भगवान की वह दिव्य अभिव्यक्ति है, जिसके शरीर के विभिन्न अंगों से लोक, दिशाएँ, देवता, इंद्रियाँ और तत्व उत्पन्न हुए। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र—ये सभी विराट पुरुष के विभिन्न अंगों से उत्पन्न हुए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि समाज की संपूर्ण रचना भी भगवान की योजना का ही भाग है। इस अध्याय में बताया गया है कि जब तक भगवान की चेतना विराट पुरुष में प्रविष्ट नहीं हुई, तब तक सृष्टि निष्क्रिय थी। भगवान के प्रवेश के साथ ही समस्त इंद्रियाँ, प्राण और चेतना सक्रिय हुईं। यह सिद्ध करता है कि चेतना का मूल स्रोत भगवान स्वयं हैं, न कि भौतिक तत्व। यह अध्याय साधक को यह सिखाता है कि सृष्टि को भोग की वस्तु नहीं, बल्कि भगवान के शरीर के रूप में देखना चाहिए। जब यह दृष्टि विकसित होती है, तब अहंकार का नाश होता है और भक्ति स्वाभाविक रूप से जाग्रत होती है। 🪔 “विराट पुरुष का दर्शन जीव को भगवान की सर्वव्यापकता का अनुभव कराता है।” 🙏 Support the Seva If you like the video, please: 👍 Like 💬 Comment 🔔 Subscribe 🔗 Share this video with others searching for spiritual wisdom. Your support helps divine knowledge reach more souls. 00:00 Lecture 06:20 Discussion 23:20 Summary #श्रीमदभागवतमहापुराण #स्कंध3अध्याय6 #विराटपुरुष #सृष्टिरहस्य #भागवत कथा #भक्तियोग #सनातनधर्म #वेदिकज्ञान