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ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय सरकार (पंचायती राज व्यवस्था) का गठन 3-स्तरीय संरचना के माध्यम से होता है: ग्राम पंचायत (गाँव), पंचायत समिति (ब्लॉक), और जिला परिषद (जिला)। यह प्रणाली ७३वें संवैधानिक संशोधन के तहत अनिवार्य है, जिसमें प्रत्यक्ष चुनाव, वार्ड सदस्य (पंच), सरपंच, और महिलाओं व आरक्षित वर्गों के लिए सीटें शामिल हैं। ग्रामीण स्थानीय सरकार का गठन (त्रिस्तरीय संरचना): ग्राम स्तर: ग्राम पंचायत (Gram Panchayat) गठन: गाँव के सभी वयस्क (वोटर) मिलकर 'ग्राम सभा' बनाते हैं। ग्राम सभा के सदस्य अपने ही बीच से वार्ड पंचों और एक 'सरपंच' या 'मुखिया' का चुनाव करते हैं। सदस्य: सरपंच और वार्ड पंच (पंच), जो 5 वर्षों के लिए चुने जाते हैं। सचिव: एक सरकारी कर्मचारी (पंचायत सचिव) होता है, जो बैठकें और विकास कार्य का रिकॉर्ड रखता है (यह निर्वाचित नहीं होता)। ब्लॉक स्तर: पंचायत समिति (Panchayat Samiti) गठन: ग्राम पंचायतों के समूह से मिलकर बनी है। सदस्य: इसमें सरपंच, ब्लॉक के अन्य सदस्य और पदेन सदस्य शामिल होते हैं। जिला स्तर: जिला परिषद (District Council) गठन: यह सबसे ऊपरी स्तर है, जो ब्लॉक/पंचायत समितियों के कार्यों की देखरेख करती है। प्रमुख विशेषताएं: चुनाव: सभी स्तरों पर सदस्यों का चुनाव 5 वर्ष के लिए प्रत्यक्ष रूप से गांव वालों द्वारा किया जाता है। आरक्षण: महिलाओं और अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) के लिए सीटें आरक्षित होती हैं। कार्य: स्थानीय विकास (सड़कें, जल, स्कूल, स्वास्थ्य, स्वच्छता) और सरकारी योजनाओं को लागू करना। उद्देश्य: जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करना और ग्रामीणों को निर्णय लेने में भागीदारी देना।