У нас вы можете посмотреть бесплатно "सतबाप- सतटीचर- सतगुरु के वरदानों से, आशीर्वादों से भरपुर, मालामाल बनो"। (19/02/2026) или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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ओम शांति। "भारत इस समय रौरव नर्क है, आत्माओं को यहां दुःख ही दुःख है, सब के लिए त्राहि-त्राहि है"। "शिव भगवानुवाच- पांच विकारों (काम-क्रोध-मोह-लोभ-अहंकार) रूपी रावण को माया कहा जाता है"। "धन को संपत्ति कहा जाता है"। (भाग-1) "बापदादा की दिल्ली से ज्ञान मुरली"। (20/02/1965) “मीठे बच्चे- अभी भारत खास और आम सारी दुनिया पर ब्रह्स्पति की दशा बैठनी है"। "बाबा तुम बच्चों द्वारा भारत को सुखधाम बना रहे हैं"। "भारत को फिर 16 कला संपूर्ण जरूर बनना है"। "तुम जानते हो- हम, इस योगबल से 16 कला संपूर्ण बन रहे हैं"। "कहते हैं ना? दे दान तो छूटे ग्रहण"। "बाप भी कहते हैं- विकारों का, अवगुणों का दान दो"। "यह रावण राज्य है"। "बाप आकर इनसे छुड़ाते हैं"। "इसमें भी काम विकार बड़ा भारी अवगुण है"। तुम "देह-अभिमानी" बन पड़े हो। अब "देही-अभिमानी" बनना पड़े। "शरीर का भान भी छोड़ना पड़े"। इन बातों को तुम बच्चे ही समझते हो, दुनिया नहीं जानती। "भारत जो 16 कला संपूर्ण था, संपूर्ण देवताओं का राज्य था, अभी ग्रहण लगा हुआ है"। "इन लक्ष्मी-नारायण की राजधानी थी ना"? "भारत स्वर्ग था"। "अब विकारों का ग्रहण लगा हुआ है" इसलिए "बाप कहते हैं- दे दान तो छूटे ग्रहण"। "यह काम विकार ही गिराने वाला है" इसलिए "बाप कहते- यह दान दो तो तुम 16 कला बन जाएंगे"। "नहीं देंगे, तो नहीं बनेंगे"। अच्छा। (19/02/2026)