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रात को नींद न आना आजकल की एक आम समस्या बन गई है। जब चारों ओर सन्नाटा पसरा होता है, दुनिया सो जाती है, लेकिन आपकी आंखें खुली रहती हैं और दिमाग में हजारों विचारों का शोर मचता है, तो यह समय बेहद कष्टदायक हो जाता है। कई बार यह चिंता, भविष्य के प्रति असमंजस, किसी बीते हुए पछतावे या फिर अकेलेपन के कारण होता है। ऐसे में, अगर कोई मार्गदर्शक, कोई प्रेरणास्रोत हो, तो यह रात हमें निराशा की गहरी खाई में गिराने के बजाय आत्मचिंतन और नई ऊर्जा का केंद्र बन सकती है। भगवान श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व और उनका जीवन दर्शन इस प्रकार की हर समस्या का समाधान हमें देता है। वे केवल देवता नहीं, बल्कि एक महान दार्शनिक, कर्मयोगी और सर्वोत्तम मित्र हैं। उनकी शिक्षाएं हजारों वर्षों बाद भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी महाभारत काल में थीं। जब रात को नींद न आए, तो श्रीकृष्ण के जीवन के कुछ प्रेरक प्रसंग और उनके उपदेश आपके लिए रामबाण साबित हो सकते हैं गीता में श्रीकृष्ण ने छठे अध्याय के 16वें और 17वें श्लोक में जीवन की सफलता के लिए संतुलित आहार और संतुलित निद्रा पर बल दिया है। वे कहते हैं: "नात्यश्नतस्तु योगोऽस्ति न चैकान्तमनश्नतः। न चाति स्वप्नशीलस्य जाग्रतो नैव चार्जुन।।" (अर्थ : हे अर्जुन! योग उस व्यक्ति को नहींीं मिलता जो बहुत अधिक खाता है, न उसे जो बिल्कुल नहीं खाता; न उसे जो बहुत अधिक सोता है, न उसे जो सदा जागता रहता है।) इसका सीधा अर्थ यह है कि नींद का आना और जागना, दोनों ही स्वाभाविक प्रक्रियाएं हैं। इनमें अतिवाद नहीं होना चाहिए। यदि रात को नींद नहीं आ रही है, तो यह शरीर या मन में किसी असंतुलन का संकेत है। श्रीकृष्ण हमें यहाँ आत्म-निरीक्षण करने की प्रेरणा देते हैं। कहीं आप दिन में बहुत अधिक सोते तो नहीं? कहीं आपका भोजन असंतुलित तो नहीं? कहीं आपके मन में कोई ऐसी चिंता तो नहीं, जिसे आप दिन के शोर में दबा देते हैं, लेकिन रात के सन्नाटे में वह उभर कर सामने आ जाती है? नींद न आने का सबसे बड़ा कारण होती है चिंता। कल क्या होगा? अगर मैं असफल हो गया तो? लोग क्या कहेंगे? ये सारे प्रश्न हमारे मन को अशांत कर देते हैं। "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि।।" (2.47) (अर्थ : तेरा कर्म करने में ही अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तू कर्मों के फल का हेतु मत बन और न ही तेरी कर्म न करने में आसक्ति हो।) जब रात को नींद न आए, तो यह समय यह सोचने का है कि आपने अपना कर्म ईमानदारी से किया या नहीं। यदि हाँ, तो फिर परिणाम की चिंता क्यों? परिणाम तो ईश्वर के हाथ में है। यदि आप रात भर जागकर परिणाम के बारे में सोचेंगे, तो वह बदलेगा नहीं, बल्कि आपकी ऊर्जा ही नष्ट होगी। अक्सर हम अतीत की गलतियों या दुखद घटनाओं को बार-बार मन में दोहराते हैं, खासकर रात के एकांत में। यह आदत हमें भीतर ही भीतर खोखला कर देती है। श्रीकृष्ण का जीवन इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि कैसे हर पल को नए सिरे से जीना चाहिए। उन्होंने कंस के अत्याचारों को देखा, मामा के कारावास में बिताए बचपन के दिनों को याद किया, लेकिन वे उन घटनाओं में उलझकर नहीं रह गए। गीता में वे कहते हैं कि जो व्यक्ति अतीत में हुई घटनाओं पर शोक करता है, वह मूर्ख है। जो हुआ, वह अच्छा हुआ। जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है। जो होगा, वह भी अच्छा होगा। यह भाव हमारे मन से अतीत का बोझ उतार देता है। जब आप बिस्तर पर लेटे हों और अतीत की कोई कड़वी याद आपको बेचैन कर रही हो, तो श्रीकृष्ण के इस सिद्धांत को याद कीजिए। नींद न आने का एक कारण अकेलापन भी होता है। लगता है कि दुनिया में कोई हमारा नहीं है, हम अकेले हैं। लेकिन श्रीकृष्ण का जीवन हमें सबसे बड़ा साथ देता है। वे मित्र हैं, सखा हैं, मार्गदर्शक हैं। द्रौपदी ने जब अकेलेपन और लज्जा की घड़ी में उन्हें पुकारा, तो वे दौड़े चले आए। उनके पास कोई भौतिक हथियार नहीं था, केवल उनकी उपस्थिति ने द्रौपदी की रक्षा की। जब रात को नींद न आए, तो महसूस कीजिए कि श्रीकृष्ण आपके साथ हैं। उनसे बात कीजिए। उन्हें अपनी समस्या बताइए। उन्हें अपना मित्र मानिए। आप पाएंगे कि आप अकेले नहीं हैं। श्रीकृष्ण की रासलीला को अक्सर गलत अर्थों में लिया जाता है, लेकिन इसका आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा है। यह परमात्मा और जीवात्मा के मिलन का प्रतीक है। गोपियाँ रात भर कृष्ण की बांसुरी की धुन पर नाचती थीं, लेकिन उनकी यह रात सिर्फ शारीरिक नृत्य नहीं था, बल्कि परमानंद में डूबने का समय था। जब आपकी रात नींद से जागरण में बदल रही है, तो इस समय को श्राप न बनाएँ। इसे वरदान में बदलें। यह समय आपके भीतर झांकने का है। श्रीकृष्ण की बांसुरी की कल्पना करें। वह बांसुरी जो सभी को अपनी ओर आकर्षित करती है। उस ध्वनि को सुनने की कोशिश करें। अपने मन को उस परम शांति और आनंद में खो दें। जब आप चिंता और तनाव को छोड़कर इस आनंद की खोज में लग जाएंगे, तो वही आनंद आपको गहरी नींद के रूप में मिलेगा। निष्कर्ष प्रिय मित्र, रात का जागरण आपकी कमजोरी नहीं, बल्कि आपके मन की गहराई का प्रतीक है। श्रीकृष्ण के जीवन से हम सीखते हैं कि हर परिस्थिति का सामना धैर्य, ज्ञान और आस्था से करना चाहिए। जब भी नींद न आए, तो इसे अपने मन की सफाई का समय समझें। अतीत को भूलाएँ, भविष्य की चिंता छोड़ें और वर्तमान क्षण को श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित कर दें। #KrishnaTeachings #PeacefulSleep #MindCalm #SpiritualHealing #NightThoughts #InnerPeace #Meditation #BhagavadGita #PositiveMind 🔔 for more vedio : / @vanijeevangeeta 🎵 Music Credit 🎶 Track Name: Heavenly 🎶 Genre : classical 🎼 Artist: Aakash Gandhi 📁 Source: YouTube Audio Library 📜 License: Free for YouTube use