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शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि शिव के अनंत, निराकार और ज्योतिर्मय स्वरूप की स्मृति का दिव्य अवसर है। यह वह पावन रात्रि है जब भगवान शिव ने ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट होकर सृष्टि को अपने वास्तविक अस्तित्व का बोध कराया। महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है और इसे आत्म-जागरण, तप, भक्ति और अंतर्मन की शुद्धि की रात्रि कहा गया है। शिव पुराण में वर्णित लिंगोद्भव कथा महाशिवरात्रि का मूल आधार है। एक समय ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। तभी उनके मध्य एक अनंत अग्निमय ज्योति-स्तंभ प्रकट हुआ। वह स्तंभ इतना विशाल था कि उसका न आदि दिखाई देता था, न अंत। भगवान विष्णु वराह रूप लेकर नीचे की ओर उसके मूल को खोजने गए और ब्रह्मा हंस बनकर ऊपर की ओर उसके शिखर की खोज में उड़ चले। अनगिनत प्रयासों के बाद भी दोनों उसकी सीमा तक नहीं पहुँच सके। विष्णु ने विनम्रतापूर्वक अपनी असमर्थता स्वीकार कर ली, किंतु ब्रह्मा ने केतकी पुष्प को साक्षी बनाकर असत्य कहा कि उन्होंने शिखर देख लिया है। तभी उस अनंत ज्योति से भगवान शिव प्रकट हुए। उन्होंने ब्रह्मा के असत्य पर उन्हें शाप दिया कि उनकी पृथ्वी पर पूजा नहीं होगी और केतकी पुष्प को भी शाप दिया कि वह शिव पूजा में अर्पित नहीं किया जाएगा। यही दिव्य प्राकट्य फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को हुआ था, इसलिए यह तिथि महाशिवरात्रि के रूप में प्रतिष्ठित हुई। यह ज्योतिर्लिंग शिव के अनादि, अनंत और निराकार स्वरूप का प्रतीक है, जो सिखाता है कि अहंकार का अंत ही सत्य की शुरुआत है। शिव पुराण में महाशिवरात्रि को जागरण की रात्रि कहा गया है—बाहरी ही नहीं, बल्कि आंतरिक जागरण की। इस रात्रि में उपवास, रात्रि-जागरण, ध्यान और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप विशेष फलदायी माना गया है। चार प्रहरों में शिवलिंग का अभिषेक जल, दूध, दही, घृत और मधु से किया जाता है। यह पूजा केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धि का साधन है। महाशिवरात्रि से जुड़ी समुद्र मंथन की घटना भी शिव की करुणा का प्रतीक है। जब हलाहल विष से सृष्टि संकट में पड़ी, तब भगवान शिव ने उसे अपने कंठ में धारण कर नीलकंठ रूप लिया और समस्त जगत की रक्षा की। यह त्याग और समर्पण का सर्वोच्च संदेश देता है। वहीं शिकारी गुरुद्रुह की कथा बताती है कि शिव भाव के भूखे हैं—अनजाने में की गई सच्ची भक्ति भी जीवन को बदल सकती है। इस प्रकार, महाशिवरात्रि विवाह या उत्सव मात्र नहीं, बल्कि जीव और शिव के मिलन का प्रतीक है। यह अज्ञान से ज्ञान की ओर, अशांति से शांति की ओर और सीमित अहंकार से अनंत चेतना की ओर बढ़ने का निमंत्रण है। हर शिवलिंग उसी अनंत ज्योति का प्रतीक है जो हमें याद दिलाता है कि परम सत्य बाहर नहीं, हमारे भीतर ही विद्यमान है—और उसे अनुभव करना ही महाशिवरात्रि का वास्तविक अर्थ है। 🕉️ #Mahashivratri #ShivPuran #HarHarMahadev #OmNamahShivaya #ShivBhakti #Bholenath #Mahadev #Jyotirlinga #Shivratri #Neelkanth #ShivTatva #SanatanDharma #ShivKatha #Bhakti #HinduFestival #ShivShakti #SpiritualAwakening #ShivMahima #Devotion #Shiv 🔔 for more vedio : / @vanijeevangeeta 🎵 Music Credit 🎶 Track Name: Heavenly 🎶 Genre : classical 🎼 Artist: Aakash Gandhi 📁 Source: YouTube Audio Library 📜 License: Free for YouTube use