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Dehradun To My Village || देहरादून से मेरा गॉव || Jaunsar Bawar || Vlog #chakratahillstation #mauntains #jaunsarbawar #uttarakhand #newvideo {Do like, share, and subscribe to my channel} About jaunsar bawar ⬇️ देहरादून का यह जनजातीय क्षेत्र शहर के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। कालसी, चकराता व त्यूनी तहसीलें इसी क्षेत्र के अन्तर्गत हैं। सामान्यतः यह क्षेत्र यमुना और टौंस नदियों के मध्य में स्थित है। इस क्षेत्र के प्रमुख स्थल हैं- कालसी, लाखमण्डल, बैराटगढ़ और हनोल । सामाजिक दृष्टि से जौनसार-बावर के दो प्रमुख क्षेत्र हैं जिसमें दो प्रमुख समुदाय निवास करते हैं। नीचे का आधा भाग 'जौनसार' है और ऊपरी हिमाच्छादित भाग 'बावर'। खरम्बा चोटी (3084 मी.) बावर क्षेत्र में ही आती है। यद्यपै दोनों क्षेत्र सटे हुए हैं किन्तु इसके मूल निवासी अपनी उत्पत्ति बिलकुल अलग-अलग मानते हैं। जौनसार जनजाति के लोग अपने को पाण्डवों का वंशज मानते हैं जिनको पाशि कहां जाता है और बावर के लोग अपने को दुर्योधन का वंशज]]। जिनको षाठी कहा जाता है ये दोनों समुदाय शताब्दियों से विश्व समुदाय से कटे हुए हैं जिसके कारण इनकी अद्वितीय संस्कृति और परम्पराएँ बची हुई हैं। दोनों समुदायों के बीच विवाह सम्बन्ध भी यदा-कदा ही होते हैं। जौनसारी समुदाय में बहुपतित्व की परम्परा है। स्थानीय जौनसार बावर क़बीले की संस्कृति अन्य पहाड़ी क्षेत्रों से भिन्न है जो गढ़वाल, कुमाऊँ और हिमाचल प्रदेश में हैं। इसी का एक रिवाज बहुविवाह और बहुपति प्रथाएँ हैं जो यहाँ देखी जाती हैं। यहाँ के अमीर आदिवासी कई पत्नियाँ रखते हैं जबकि उनके गरीब साथी अपनी पत्नी को अपने भाईयों के साथ साझा करते हैं, यहाँ कि इस प्रथा को बहुपति प्रथा कहा जाता है यह प्रथा परिवार को एक डोर में बंधे रखती है जिससे परिवार में सदस्यों कि सख्या बढ़ती रहती है जो कि आपसी प्रेम का एक उदाहरण है | इस बात को कई बार महाभारत में वर्णित पाँच पांडवों के द्रौपदी से विवाह से जोड़कर देखा जाता है, जिससे कि जौनसारी लोग अपने वंश को जोड़कर देखते हैं।मानव-शास्त्र के अध्ययनों से पता चलता है कि इन प्रथाओं के स्थान पर एक संगमन ही प्रचलित हो रहा है। इनकी संस्कृति में एक मुख्य पहलू खेल और नृत्य हैं जिनमें लोक नृत्य 'बारदा नाटी'और "हारूल" है जो सभी समारोहों में प्रदर्शित होता है। जौनसारियों का सबसे महत्वपूर्ण पर्व 'माघ मेला' है| जिसमें जानवरों की बली की रस्म होती है, जो 'मारोज' के वध का जश्न है। लोक मान्यता के अनुसार मारोज एक राक्षस था जो इस घाटी का कई सालों तक पीछा करता रहा। पर्वों के समय लोग थलका या लोहिया पहनते हैं, जो एक लम्बा कोट होता है। नृत्य करने वाले लड़के और लड़कियाँ रंगीन पौशाक पहनती हैं। Beautiful sunset in chakrata- • Beautiful Sunset | Jaunsar Bawar | Ramtal ... Moila top - • Moila top | Chakrata hill station | Jaunsa... For any query ⬇️ Gmail - keshavtomar58@gmail.com Travelwithbunny@gmail.com You can also follow me on Instagram Travel_with_bunny09 Keshav tomar From - Dehradun, Uttarakhand