У нас вы можете посмотреть бесплатно प्रकृति को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता इंसान उसके नियमों पर विश्वास करे या नहीं | adarsh или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
प्रकृति को हमारे विश्वास की परवाह क्यों नहीं है? क्या आपने कभी सोचा है… अगर कोई कहे कि “मैं गुरुत्वाकर्षण पर विश्वास नहीं करता,” तो क्या वो आसमान से गिरते समय बच जाएगा? बिल्कुल नहीं। क्योंकि प्रकृति के नियम न हमारे विश्वास पर टिके हैं, न हमारे धर्म पर, न ही हमारी परंपराओं पर। प्रकृति के नियम — जैसे गुरुत्वाकर्षण, ऋतु परिवर्तन, जन्म और मृत्यु का चक्र — बिना रुके, बिना डगमगाए, वैसे ही चलते रहते हैं। धर्म कहता है कि भगवान पर विश्वास करो, वरना दंड मिलेगा। समाज कहता है कि कानून मानो, वरना सज़ा होगी। लेकिन प्रकृति? प्रकृति कुछ नहीं कहती। वो बस अपने नियमों के अनुसार काम करती है — बिना पक्षपात, बिना समझौते। ☀️ धूप सबको मिलती है — राजा को भी और भिखारी को भी। 🌧 बारिश सबको भिगोती है — आस्तिक को भी और नास्तिक को भी। ⚡ भूकंप जब आता है, तो उसे फर्क नहीं पड़ता कि कोई मंदिर में है या मस्जिद में। यही कारण है कि प्रकृति सबसे न्यायपूर्ण है। उसके लिए अमीर और गरीब, भक्त और नास्तिक, ज्ञानी और अज्ञानी — सब बराबर हैं। लेकिन इंसान का अहंकार देखिए। वो सोचता है कि पूजा करने से बारिश हो जाएगी, दुआ करने से बीमारी दूर हो जाएगी, या किसी मंत्र से मौत टल जाएगी। सच्चाई यह है कि प्रकृति को न हमारी प्रार्थना से फर्क पड़ता है और न ही हमारी मान्यताओं से। वो सिर्फ अपने ही नियमों पर चलती है। 🧭 असली बुद्धिमानी यही है — प्रकृति को बदलने की कोशिश मत करो, बल्कि उसे समझो। उसके साथ सामंजस्य बनाओ। विज्ञान इसी का नाम है। जब इंसान ने आग की शक्ति समझी, तो उसने अंधकार मिटाया। जब बीमारियों के नियम समझे, तो चिकित्सा विज्ञान बनाया। यानी असली ताकत विश्वास में नहीं, समझ में है। 🙏 तो सवाल यह नहीं कि “हम प्रकृति को कैसे मनाएँ?” सवाल यह है कि “हम प्रकृति को कितना समझ पाए?” क्योंकि अंत में — तुम मानो या न मानो, सूरज फिर भी उगेगा। मृत्यु फिर भी आएगी। और जीवन… हमेशा उसी ताल पर नाचता रहेगा, जिसे प्रकृति ने रचा है। #प्रकृति #विज्ञान #Philosophy #Nature #Truth #Life