У нас вы можете посмотреть бесплатно "निराकार सतगुरु शिवबाबा वर्ल्ड ऑलमाइटी अथॉरिटी है"। (भाग-1) "बापदादा मधुबन ज्ञान मुरली"।(27/02/1966) или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
"निराकार सतगुरु शिवबाबा वर्ल्ड ऑलमाइटी अथॉरिटी है"। (भाग-1) "बापदादा मधुबन ज्ञान मुरली"।(27/02/1966) ओम् शांति। मीठे-मीठे सिकीलधे (बिछड़े) बच्चों प्रति गुडमॉर्निंग। बच्चे यह तो जानते हैं की "सतयुग में सदैव गुडमॉर्निंग, गुड डे, गुड एवरीथिंग, गुडनाइट, सब गुड ही गुड है"। "यहां कलयुग में तो न गुडमॉर्निंग है, न गुडनाइट है"। सबसे बुरी है "नाइट, रात"। तो सबसे अच्छा क्या है? "सवेरा"। जिसको "अमृतवेला" कहा जाता है। "तुम्हारा संगमयुग का हर समय गुड ही गुड है"। बच्चे जानते हैं कि इस समय हम "योग-योगेश्वर और योग-योगेश्वरी हैं"। "ईश्वर जो तुम्हारा बाप है, वह आकर योग सिखाते हैं अर्थात् तुम बच्चों का एक ईश्वर के साथ योग है"। तुम बच्चों को "योग-योगेश्वर" के बाद "ज्ञान-ज्ञानेश्वर" बाप का पता पड़ा है। "योग" लगा फिर बाप तुमको "सारे चक्र की नॉलेज" समझाते हैं, जिससे तुम भी "ज्ञान-ज्ञानेश्वर" बनते हो। "ईश्वर बाप, बच्चों को आकर ज्ञान और योग सिखाते हैं"। कौनसा "ईश्वर"? "निराकार बाप"। अब "बुद्धि" से काम लो। "गुरु" लोगों की तो बहुत मत हैं। कोई कहेंगे- कृष्ण से योग लगाओ, फिर उनका चित्र भी देंगे। "कोई सांई बाबा, कोई महर्षि बाबा, कोई मुसलमान का, कोई पारसी का, सबको "बाबा-बाबा" कहते रहते हैं"। "कहेंगे सब भगवान ही भगवान हैं"। "अब तुम जानते हो मनुष्य भगवान हो नहीं सकता"। इन "लक्ष्मी-नारायण को भी भगवान भगवती" नहीं कह सकते। "भगवान तो एक निराकार है"। "वह तुम सब आत्माओं का बाप है, उनको कहा जाता है शिवबाबा"। तुम ही "जन्म-जन्मांतर सतसंग" करते आए। कोई न कोई संन्यासी साधू पंडित आदि जरूर होंगे। लोग जानते हैं कि यह हमारा "गुरु" है। हमको कथा सुना रहे हैं। "सतयुग" में कथाएं आदि होती नहीं। बाप बैठ समझाते हैं सिर्फ "भगवान वा ईश्वर" कहने से रसना नहीं आती है। "वह बाप है, तो बाबा कहने से संबंध स्नेह पूर्ण हो जाता है"। तुम जानते हो हम. "बाबा-मम्मा" के बच्चे बने हैं, जिससे हमको "स्वर्ग के सुख" मिलते हैं। "ऐसा कोई भी सतसंग नहीं होगा, जो समझते हो कि हम इस सतसंग से मनुष्य से देवता वा नर्कवासी से स्वर्गवासी बनते हैं"। अभी तुम्हारा "सत बाप के साथ संग" है और "सबका असत्य के साथ संग" कहा जाता है। "गाया भी जाता है सत संग तारे, जिस्मानी कुसंग (झूठ) बोरे (डुबोए)"। "बाप कहते हैं अब आत्म-अभिमानी, देही-अभिमानी बनो"। "मैं तुम बच्चों, आत्माओं को सिखाता हूँ"। "यह रूहानी नॉलेज रूहों प्रति सुप्रीम रूह आकर देते हैं"। बाकी सब है "भक्ति मार्ग"। वह कोई "ज्ञान मार्ग" नहीं है। "बाप कहते हैं- मैं सब वेदों, शास्त्रों को, सृष्टि के आदि-मध्य-अंत को जानने वाला हूँ"। "अथॉरिटी" मैं हूँ। वह है "भक्ति मार्ग की अथॉरिटी"। बहुत शास्त्र आदि पढ़ते हैं तो उनको कहते हैं "शास्त्रों की अथॉरिटी"। तुमको बाप "सच" आकर सुनाते हैं। "अभी तुम जानते हो सत का संग तारे, झूठ का संग डुबोए"। "अब बाप तुम बच्चों द्वारा भारत को सैलवेज कर रहे हैं"। तुम हो "रूहानी सैलवेशन आर्मी"। "सैलवेज" करते हैं। "बाप कहते हैं कि भारत जो स्वर्ग था वह अब नर्क बना हुआ है"। "डूबा" हुआ है। बाकी कोई ऐसा सागर के नीचे नहीं है। "तुम सतोप्रधान से तमोप्रधान बने हो"। "सतयुग-त्रेता है सतोप्रधान"। यह बड़ा स्टीमर है। तुम स्टीमर में बैठे हो। "यह पाप की नगरी है क्योंकि सब पाप आत्माएं हैं"। वास्तव में "गुरु" एक है। उनको कोई जानते नहीं हैं। हमेशा कहते हैं "ओ गॉड फादर"। ऐसे नहीं कहते "गॉड फादर कम प्रीसेप्टर"। नहीं, सिर्फ "फादर" कहते हैं। "वह पतित-पावन है, तो गुरु भी हो गया"। "सर्व का पतित-पावन सद्गति दाता एक है"। "इस पतित दुनिया में कोई भी मनुष्य सद्गति दाता वा पतित-पावन हो नहीं सकता"। "बाप कहते हैं कितनी एडल्ट्रेशन, करप्शन है"? अब मुझे, "कन्याओं-माताओं के द्वारा सबका उद्धार करना है"। तुम सब "ब्रह्माकुमार-कुमारियां" भाई-बहिन हो गए । नहीं तो "डाडे (दादे)" का वर्सा कैसे मिले? "डाडे" से वर्सा मिलता है "21 पीढ़ी अर्थात् स्वर्ग की राजाई"। कमाई कितनी बड़ी है? "यह है सच्ची कमाई, सच्चे बाप द्वारा"। "बाप, बाप भी है, शिक्षक भी है, सतगुरू भी है"। प्रैक्टिकल में करके दिखाने वाला है। ऐसे नहीं कि गुरु मर गया तो चेले को गद्दी मिले। "वह है जिस्मानी गुरु, यह है रूहानी गुर"। अच्छी रीति इस बात को समझना है, यह बिल्कुल नई बातें हैं। "तुम जानते हो हमको कोई मनुष्य नहीं पढ़ाता है"। हमको "शिवबाबा", "ज्ञान का सागर पतित-पावन इस शरीर द्वारा पढ़ाते हैं"। तुम्हारी बुद्धि "शिवबाबा" तरफ है। उन सतसंगों में मनुष्य तरफ बुद्धि जाएगी। वह सब हैं भक्ति मार्ग। अब तुम गाते हो तुम मात-पिता हम बालक तेरे यह तो एक है ना? परंतु "बाबा कहते हैं कि मैं कैसे आकर तुमको अपना बनाऊं"? "मैं तुम्हारा पिता हूँ"। तो इनके (ब्रह्मा) तन का आधार लेता हूँ। तो यह (ब्रह्मा) हमारी "स्त्री भी है, तो बच्चा भी है"। इन (ब्रह्मा) द्वारा "शिवबाबा" बच्चों को एडॉप्ट करते हैं तो यह बड़ी "मम्मा" हो गई। इनकी (ब्रह्मा) कोई "माँ" नहीं है। "सरस्वती को जगदंबा (जगत अम्बा) कहा जाता है"। उनको तुम्हारी संभाल करने के लिए मुकर्रर किया है। "सरस्वती- ज्ञान ज्ञानेश्वरी, यह है छोटी मम्मा"। यह बड़ी गुह्य बातें हैं। तुम अभी यह गुह्य पढ़ाई पढ़ रहे हो, तुम्हें "विद रिस्पेक्ट (ऑनर) पास" होना है। यह "लक्ष्मी-नारायण विद रिस्पेक्ट पास हुए हैं"। उन्हों को "सबसे बड़ी स्कॉलरशिप" मिली है। उनको कोई सजा खानी नहीं पड़ी। "बाप कहते हैं- जितना हो सके मुझे याद करो"। इसको "भारत का प्राचीन योग" कहा जाता है। बाप कहते हैं- तुमको सभी वेदों, शास्त्रों का सार सुनाता हूँ। "मैंने तुमको राजयोग सिखाया, जिससे तुमने प्रालब्ध पाई"। फिर "ज्ञान खलास हो गया, फिर परंपरा कैसे चल सकता"? वहां कोई शास्त्र आदि होते नहीं और धर्म वाले इस्लामी, बौद्धी आदि जो हैं उनका ज्ञान गुम नहीं होता। उन्हों का "परंपरा" चलता है, सबको मालूम है। (27/02/1966)