У нас вы можете посмотреть бесплатно “चेहरे की चमक, आध्यात्मिक आनंद और माया का सूक्ष्म जाल | प्रेमानंद जी महाराज” или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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मैं आपके जैसे चेहरे की चमक चाहता हूँ… क्या करूँ? आध्यात्मिक आनंद क्या होता है? देहाभिमान बार-बार परास्त क्यों कर देता है? कर्तव्य और परिवार में किसे प्राथमिकता दें? माया का वह सूक्ष्म रूप कौन सा है जो साधक को अंत तक भ्रमित करता है? और जो मांस, मदिरा या गाली देने वाले हों, उनमें भगवान को कैसे देखें? इन सभी गहरे और जीवन से जुड़े प्रश्नों का उत्तर इस सत्संग में प्रेमानंद जी महाराज बहुत सरल, व्यावहारिक और हृदय को छू लेने वाले शब्दों में देते हैं। यह वीडियो विशेष रूप से उन साधकों के लिए है जो: • आध्यात्मिक आनंद की खोज में हैं • देहाभिमान से बार-बार हार जाते हैं • गृहस्थ जीवन और कर्तव्य में उलझे रहते हैं • माया के सूक्ष्म प्रभाव को समझना चाहते हैं • हर व्यक्ति में भगवान को देखना सीखना चाहते हैं इस वीडियो में प्रस्तुत सत्संग वाणी को विषय के अनुसार संपादित किया गया है और आवश्यक स्थानों पर मेरी अपनी आवाज़ में इसका सरल भावार्थ समझाया गया है, ताकि दर्शक इसे अपने दैनिक जीवन में उतार सकें। यह वीडियो केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और व्यवहार में परिवर्तन के उद्देश्य से बनाया गया है। ⏱️ TIMESTAMPS: 00:00 — Introduction प्रश्न: मैं आपके जैसे चेहरे की चमक चाहता हूं। क्या करूं? 00:16 — प्रेमानंद जी महाराज का उत्तर 03:02 — इस वाणी का सरल अर्थ (व्याख्या) 03:36 — प्रश्न:आध्यात्मिक आनंद क्या है और इसे कैसे प्राप्त करें? 03:40 — प्रेमानंद जी महाराज का उत्तर 06:05 — इस वाणी का सरल अर्थ (व्याख्या) 06:26 — प्रश्न:देहाभिमान बहुत बढ़ गया है, बार-बार परास्त कर देता है। 06:31 — प्रेमानंद जी महाराज का उत्तर 07:16 — इस वाणी का सरल अर्थ (व्याख्या) 07:47 — प्रश्न:कर्तव्य और परिवार में किसको प्राथमिकता दूं? 07:51 — प्रेमानंद जी महाराज का उत्तर 09:09 — इस वाणी का सरल अर्थ (व्याख्या) 09:31 — प्रश्न:माया का वह सूक्ष्म रूप क्या है, जो साधक को अंत तक भ्रमित करता है? 09:35 — प्रेमानंद जी महाराज का उत्तर 10:25 — इस वाणी का सरल अर्थ (व्याख्या) 10:39 — मांस, मदिरा या गाली देने वाले लोगों में भगवान कैसे देखूं? 10:44 — प्रेमानंद जी महाराज का उत्तर 12:44 — इस वाणी का सरल अर्थ (व्याख्या) 📌 DISCLAIMER: यह वीडियो आध्यात्मिक और शैक्षिक (Teaching/Educational) उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इसमें प्रयुक्त सत्संग अंश को समझाने हेतु मेरी स्वयं की व्याख्या (Explanation) जोड़ी गई है। इसका उद्देश्य किसी प्रकार का दावा करना नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ज्ञान को सरल रूप में प्रस्तुत करना है। यदि यह सत्संग आपके मन को स्पर्श करे, तो इसे किसी एक अपने तक अवश्य पहुँचाएँ 🙏 🙏 राधे राधे 🙏 🕉️ जय श्री कृष्ण 🕉️