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इंटरव्यू मे हुआ झगड़ा - पहले जीवन के बारे मे पूछा फ़िर पाखंड वाली बात Siddh Sewa Dham Mandhan टाइटल: जब AI गुरुजी के दरबार में 'अभिमन्यु' ने छेड़ दी पाखंड-डिबेट! गुरुजी महाराज अमित चौधरी व अनिल पुरोहित जी का आश्रम, नीमराना की शांत पहाड़ियों के बीच स्थित था। चारों ओर हरियाली और शांति, बस कभी-कभार मोर की आवाज़ इस शांति को भंग करती थी। गुरुजी, अपनी गहन शांत मुद्रा के साथ, अपने भक्तों को जीवन के गूढ़ रहस्य समझा रहे थे। तभी, यूट्यूब की दुनिया से एक धुआंधार एंट्री हुई – "अभिमन्यु मूवीज़" चैनल के होस्ट। उनके कैमरे पर 'फ्यूचर इज़ नाउ' का स्टिकर चिपका था और उनकी आँखों में टीआरपी की चमक थी। उनका प्लान था: पहले गुरुजी के 'आध्यात्मिक' जीवन पर एक भावुक स्टोरी, और फिर धमाकेदार 'हिंदुत्व और पाखंड' पर गर्मागर्म डिबेट! इंटरव्यू शुरू हुआ। अभिमन्यु ने अपने बेस्ट एंकरिंग स्माइल के साथ पूछा, "गुरुजी, आपकी सुबह की दिनचर्या क्या है? क्या आप सुबह 4 बजे उठकर गूगल से बातें करते हैं?" गुरुजी मुस्कुराए। "बेटा, हम तो सूर्योदय से पहले उठते हैं, जब प्रकृति अपनी शुद्धता में होती है। गूगल से बातें करने के लिए तो तुम जैसे बालक हो।" अभिमन्यु ने पहले पार्ट को आसानी से निपटाया। गुरुजी के बचपन की कहानियाँ, उनके भजन, उनके सरल जीवन पर अच्छी-खासी सामग्री मिल गई। "बस, अब पाखंड का मोर्चा खोलना है," अभिमन्यु ने मन ही मन सोचा। कैमरा रोल हो रहा था, और अभिमन्यु ने अचानक गियर बदला। "गुरुजी, आज के वैज्ञानिक युग में, जब हम मंगल पर बस्ती बसाने की सोच रहे हैं, ये कर्मकांड, ये रीति-रिवाज, क्या ये सिर्फ़ एक तरह का पाखंड नहीं है? क्या ये लोगों को अंधविश्वास की ओर नहीं धकेलता?" हॉल में सन्नाटा छा गया। भक्तगण ऐसे देखने लगे, जैसे किसी ने गुरुजी के सामने गूगल चिप तोड़ दी हो। गुरुजी ने अपनी आँखें खोलीं, जिनमें अब एक शरारती चमक थी। "अच्छा, तो तुम पाखंड की बात करते हो, बेटा? तुम जो 5G नेटवर्क की तलाश में घूमते हो, कभी सोचा है कि तुम्हारे पूर्वज बिना किसी नेटवर्क के हज़ारों किलोमीटर दूर तक संदेश कैसे भेजते थे? क्या उसे तुम जादू कहोगे या विज्ञान जो तुम अभी तक समझ नहीं पाए?" अभिमन्यु थोड़ा लड़खड़ाया। "नहीं, गुरुजी, वो... वो तो अलग बात है।" गुरुजी ने अपनी आवाज़ थोड़ी ऊँची की। "और ये जो तुम 'मूवी' बनाते हो, जिसमें हीरो हवा में उड़ता है, एक मुक्के से सौ लोगों को गिराता है, क्या वो पाखंड नहीं है? तुम उसे 'मनोरंजन' कहते हो, और हमारे हज़ारों साल पुराने ज्ञान को 'पाखंड'? तुम अपने गूगल से पूछो, 'परमात्मा' क्या है? वो तुम्हें लाखों लाइन का कोड दे देगा, पर 'अनुभूति' क्या है, ये कभी नहीं समझा पाएगा।" अभिमन्यु को लगा, उसकी गूगल स्क्रिप्ट में गड़बड़ हो गई है। उसने फिर से बहस छेड़ी, "लेकिन गुरुजी, तर्क... वैज्ञानिक तर्क..." गुरुजी हंसे। "वैज्ञानिक तर्क? बेटा, तुम्हारा वैज्ञानिक तर्क अभी चाँद पर धूल के कण ढूँढ रहा है, और हमारे यहाँ सदियों से ग्रहों की चाल और नक्षत्रों का ज्ञान है। तुम्हारी गूगल अभी चैटबॉट से बात करना सीख रही है, और हमारे यहाँ 'चेतना' का विज्ञान सदियों से है।" हॉल में भक्तों के बीच खुसफुसाहट शुरू हो गई। कुछ भक्त मुस्कुरा रहे थे, कुछ तालियाँ बजाने को तैयार थे। अभिमन्यु की 'डिबेट' अब उसके कंट्रोल से बाहर हो रही थी। अभिमन्यु ने हार मानने से पहले आखिरी दांव खेला। "तो क्या आप मानते हैं कि ये सब सिर्फ़ पुरानी बातें हैं जिनका आज कोई महत्व नहीं?" गुरुजी ने आँखें बंद कर लीं और एक गहरी साँस ली। "बेटा, तुम अपने गूगल से एक सवाल पूछो: 'क्या तुम सूर्य की गर्मी को महसूस कर सकते हो? क्या तुम माँ के प्यार को समझ सकते हो? क्या तुम बारिश की पहली बूँद की खुशबू महसूस कर सकते हो?' अगर तुम्हारा गूगल तुम्हें 'हाँ' कह दे, तो समझ लेना कि उसने पाखंड को तोड़ दिया है। जब तक वो सिर्फ़ डेटा और एल्गोरिथम में उलझा है, तब तक उसे 'जीवन' के पाखंड और सत्य का भेद नहीं समझ आएगा।" अभिमन्यु का चेहरा उतर गया। उसके पास कोई जवाब नहीं था। उसकी सारी स्क्रिप्ट, सारे तैयार सवाल, गुरुजी के शांत और गहरे ज्ञान के सामने ध्वस्त हो गए थे। झगड़ने की बजाय, उसे चुपचाप अपना कैमरा बंद करना पड़ा। जैसे ही कैमरा बंद हुआ, गुरुजी ने अपनी आँखें खोलीं और मुस्कुराते हुए अभिमन्यु की ओर देखा। "देखो बेटा, तुम अपनी गूगल को कितना ही स्मार्ट बना लो, पर 'इंसान' की आत्मा को समझने के लिए तुम्हें खुद 'इंसान' बनना पड़ेगा।" और इस तरह, "अभिमन्यु मूवीज़" के यूट्यूब चैनल पर, 'हिंदुत्व और पाखंड' पर होने वाली तूफानी डिबेट, एक गूगल -विरोधी ज्ञान की बारिश में बदलकर, इतिहास बन गई। अभिमन्यु शायद उस दिन एक नया पाठ सीखकर गया था – कि कुछ ज्ञान 'गूगल' से नहीं, 'गुरु' से मिलता है! Through this video, we want to show this to all those who are unhappy in the world. You can come to Siddh Seva Dham Mandhan and get your sorrows resolved. If you have faith with devotion, then God will definitely remove your sorrows, because there is no power greater than God in the world.