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हिंदू शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक मनुष्य जन्म के साथ चार ऋण लेकर आता है। जब तक ये ऋण चुकाए नहीं जाते, तब तक जीवन में दुख, बाधा, पितृ दोष, आर्थिक परेशानी और मानसिक अशांति बनी रहती है। आइए सरल भाषा में समझते हैं— 🔱 मनुष्य पर होते हैं 4 ऋण CREDIT - Aniruddhacharyji महराज 🚩🌸🥀🙏 1️⃣ देव ऋण किसका ऋण? देवताओं का—जिनसे हमें जीवन, प्रकृति, वायु, जल, अन्न सब प्राप्त होता है। कैसे चुकाएँ? नित्य पूजा-पाठ यज्ञ, हवन मंत्र जप, व्रत ईश्वर में श्रद्धा ना चुकाने पर क्या होता है? 👉 जीवन में मानसिक अशांति, भय, भाग्य का साथ न मिलना। 2️⃣ ऋषि ऋण किसका ऋण? ऋषि-मुनियों का—जिन्होंने वेद, उपनिषद, ज्ञान और धर्म का मार्ग दिखाया। कैसे चुकाएँ? वेद-शास्त्रों का अध्ययन सत्संग बच्चों को संस्कार देना धर्म का प्रचार ना चुकाने पर क्या होता है? 👉 बुद्धि भ्रमित रहती है, गलत निर्णय, अधर्म की ओर झुकाव। 3️⃣ पितृ ऋण किसका ऋण? माता-पिता और पूर्वजों का—जिनके कारण हमें यह शरीर मिला। कैसे चुकाएँ? माता-पिता की सेवा श्राद्ध, तर्पण कुल परंपराओं का पालन परिवार की जिम्मेदारी ना चुकाने पर क्या होता है? 👉 पितृ दोष, संतान सुख में बाधा, घर में कलह। 4️⃣ मनुष्य (भूत) ऋण किसका ऋण? समाज, जीव-जंतु, गरीब, दुखी प्राणियों का। कैसे चुकाएँ? दान-पुण्य सेवा भूखे को भोजन जीवों पर दया ना चुकाने पर क्या होता है? 👉 धन रुकना, समाज में मान-सम्मान की कमी, अकेलापन। 🌼 निष्कर्ष जो मनुष्य इन चारों ऋणों को श्रद्धा से चुकाता है— ✨ उसका जीवन सुखमय होता है ✨ भाग्य प्रबल होता है ✨ मृत्यु के बाद सद्गति मिलती है “ऋणमुक्त जीवन ही सच्चा धर्ममय जीवन है।” #चारऋण #4Rin #DevRin #RishiRin #PitraRin #ManushyaRin #SanatanDharm #BhaktiKatha #HinduGyan #AniruddhAacharyaJi #DharmikKatha #SpiritualKnowledge 4rin, char rin, dev rin, rishi rin, pitra rin, manushya rin, 4 rin kya hote hai, rin na chukane par kya hota hai, pitra dosh upay, hindu dharm rin, aniruddhacharya ji katha, bhakti katha, sanatan dharm gyan, dharmik katha hindi