У нас вы можете посмотреть бесплатно 🌟विज्ञान इसे कहता है —"Gap in Thought"भैरव इसे कहते हैं —"ध्यान" A lively conversation Audio Book или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
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A lively conversation between two hosts, कल्पना करो… एक ऐसा पल जब अचानक सब कुछ रुक जाता है। दिल तेज़ धड़कने लगता है, साँसें अनियमित हो जाती हैं, और दिमाग शोर से भर जाता है। डर… गुस्सा… अत्यधिक खुशी या गहरी पीड़ा। हम इन पलों से हमेशा भागते हैं, उन्हें कमजोरी कहते हैं, चाहते हैं कि जल्दी खत्म हो जाएँ। लेकिन विज्ञान भैरव तंत्र कहता है, यही पल सबसे शक्तिशाली होते हैं। यही पल ध्यान का द्वार हैं। भैरव कहते हैं, जब कोई भी भावना अपने चरम पर हो, उसी क्षण उसमें पूरी तरह प्रवेश कर जाओ। उसे दबाओ मत, उसे बदलने की कोशिश मत करो, उससे भागो मत, बस उसी में स्थिर हो जाओ। यह कोई किताब नहीं है, कोई पूजा नहीं, कोई नियम नहीं, बल्कि जीवन का सीधा सच है। ध्यान कहीं बाहर नहीं है, ध्यान यहीं, इसी क्षण में है। हम भावनाओं से इसलिए भागते हैं क्योंकि भावना आते ही हमारा नियंत्रण टूटने लगता है। इंसान को सबसे ज्यादा डर नियंत्रण खोने से लगता है। हमें सिखाया गया है कि रोना कमजोरी है, डर कायरता है, गुस्सा गलत है, खुशी में समय रुकना अनुचित है। लेकिन भैरव कहते हैं, भावना गलत नहीं है, उससे भागना गलत है। आधुनिक विज्ञान भी यही बताता है। जब कोई तीव्र भावना आती है, दिमाग का सोचने वाला हिस्सा कुछ पल के लिए बंद हो जाता है। यही कारण है कि डर में सोच नहीं पाते, गुस्से में गलत फैसले लेते हैं, और अत्यधिक खुशी में समय रुक जाता है। विज्ञान इसे 'Gap in Thought' कहता है, और भैरव इसे ध्यान कहते हैं। अब ध्यान से सुनो। अगली बार जब तुम्हें अचानक गुस्सा आए, डर लगे या दिल भारी हो जाए, कुछ भी मत करो। न बोलो, न भागो, न कोई निर्णय लो। बस शरीर को देखो। दिल कहाँ तेज़ धड़क रहा है? साँसें कैसी चल रही हैं? सीने में क्या हो रहा है? भावना को बदलने की कोशिश मत करो। उसे पूरा महसूस करो। कुछ सेकंड बाद अजीब कुछ घटेगा। भावना वहीं रहेगी, लेकिन 'मैं' धीरे-धीरे गायब होने लगेगा। डर रहेगा, लेकिन डरने वाला नहीं। पीड़ा रहेगी, लेकिन पीड़ित नहीं। यही वह क्षण है जहाँ मन टूटता है और वहीं से चेतना जन्म लेती है। भैरव अवस्था कोई अनुभव नहीं है, कोई भावना नहीं है। यह वह शांति है जो भावना के पार है। जहाँ डर ध्यान बन जाता है, गुस्सा ऊर्जा बन जाता है और पीड़ा जागृति बन जाती है। अगली बार जब जीवन आपको तोड़े, भागो मत। हो सकता है वही टूटना आपकी जागृति की शुरुआत हो। यही विज्ञान भैरव तंत्र का संदेश है। यही सूत्र 10 का रहस्य है। भावना चरम पर पहुँचती है और तुम स्थिर रहते हो, वही ध्यान बन जाता है। यही जीवन का गहरा रहस्य है। इस क्षण को जियो, महसूस करो, और साक्षी बनो। यह मार्ग कठिन है, लेकिन वही सच्चाई है। जब मन टूटता है और भय, क्रोध, या पीड़ा चरम पर होती है, वहीं चेतना की किरण प्रकट होती है। यह कोई सोचने वाली बात नहीं, कोई अनुमान नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष अनुभव है। यही विज्ञान भैरव तंत्र की महान शिक्षा है, यही सूत्र 10 की शक्ति है। जीवन के हर चरम पल में यही अवसर है – भय में साहस, गुस्से में शक्ति, पीड़ा में जागृति। इसे मत खोने दो। इसे महसूस करो, इसे जियो, और वहीं से वास्तविक ध्यान का मार्ग शुरू होता है। यही भैरव तंत्र का गूढ़ रहस्य है, यही जीवन का सार है। क्या आपने कभी सोचा है कि डर, गुस्सा या गहरी पीड़ा भी ध्यान का मार्ग बन सकती है? विज्ञान भैरव तंत्र का सूत्र 10 एक चौंकाने वाला सत्य उजागर करता है। यह सूत्र कहता है कि जब कोई भी भावना अपने चरम पर हो, और आप उससे भागें नहीं, उसे दबाएँ नहीं, बल्कि पूरी तरह उसमें स्थिर हो जाएँ — तो वही क्षण ध्यान बन जाता है। इस वीडियो में आप जानेंगे: • भावना और ध्यान का गहरा संबंध • डर, गुस्सा और पीड़ा कैसे जागृति बनते हैं • भैरव अवस्था क्या है • क्यों चरम भावनाएँ चेतना का द्वार खोलती हैं • ध्यान कोई अभ्यास नहीं, बल्कि एक क्षण है यह वीडियो प्रेरणा नहीं, यह अनुभव की ओर इशारा है। शांति बाहर नहीं है, वह वहीं है जहाँ आप टूटते हैं। — विज्ञान भैरव तंत्र (सूत्र 10) अगर वीडियो आपको छू जाए, तो Like करें, Share करें और ऐसे गहरे ज्ञान के लिए Channel को Subscribe करें।