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Kranti Divas 2024 - Khub Ladi Mardani Woh toh Jhansi Waali Rani Thi ‘क्रांति दिवस के शुभावसर पर महान क्रांतिवीरो को याद करते हुए विद्यालय में बडे हर्षाेल्लास से क्रांति दिवस मनाया गया। आज दिनॉंक 10/05/2024 को मिल मन्सूरपुर स्थित एमडीएस विद्या मन्दिर इण्टर कालिज में क्रांति दिवस बडे ही धूमधाम एवं हर्षाेल्लास से मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ प्रबन्धक सन्दीप कुमार एवं प्रधानाचार्य अनिल कुमार एवं सभी टीचर्स के कर कमलों द्वारा मॉं सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित व पुष्पार्चन करके किया गया। इस अवसर पर अनिल शास्त्री के द्वारा यज्ञ का आयोजन किया। यज्ञ के उपरान्त 1857 की क्रान्ति के महान योद्धाओं रानी लक्ष्मी बाई,बहादुर शाह ज़फ़र,मंगल पांडे,नाना साहेब,तात्यां टोपे,मान सिंह,कुंवर सिंह सहित माँ भारती के महान क्रान्तिवीरांे के चित्र पर पुष्पार्चन कर उन्हें नमन कर याद किया। इस अवसर पर विद्यार्थियांे ने विद्यालय अध्यापिका वैशाली राठी व पिंकी पाल के दिशा निर्देशन में देशभक्ति से ओतप्रोत अनेक झांकियां सजाई गईं व मनमोहक नृत्य की विभिन्न प्रस्तुतियां देकर सबका मन मोह लिया। कार्यक्रम में सभी बच्चों ने बढ-़चढ कर भाग लिया। विद्यालय प्रबन्धक सन्दीप कुमार ने बच्चों को क्रांति दिवस के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होनें बताया कि देश को आजादी दिलाने के लिए शहीदों ने हमारे लिए बलिदान दिया है। हमें उन्हें याद रखना चाहिए। उन्होनें कहा कि मंगल पांडे को इस क्रांति का जनक माना जाता है। उन्होंने 22 साल की उम्र में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में भर्ती होकर आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा लिया था। तांतिया टोपे को भी इस क्रांति का नायक माना जाता है। वे एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे और हज़ारों क्रांतिकारियों के प्रेरक थे। वहीं, 80 साल की उम्र में बिहार में कुंवर सिंह ने भी 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किया था। 1857 के भारतीय विद्रोह की प्रमुख व्यक्तित्वों में से एक झांसी की रानी लक्ष्मी बाई थी। जिन्होनें मर्दाना वेश धारण कर अंग्रेजों के छक्के छुडा दिय थे। विद्यालय प्रधानाचार्य अनिल कुमार ने कहा कि आज देश मातृभूमि के लिए अपने जीवन का बलिदान देने वाले भारत माता के महान क्रांतिवीरो को नमन कर रहा है। उन्होनंे कहा 1857 क्रान्ति अंग्रेजों के अत्याचार से मुक्ति के लिए शुरू की गई। क्रांति में सैनिकों ने अपना सबकुछ बलिदान कर दिया। अंग्रेजी सेना के अधिकारियों ने क्रांति को कुचलने के लिए अत्याचार की सीमा पार कर दी थी। विद्रोह करने वाले सैनिकों को गोली मारने के साथ सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका कर आमजन के मन में दहशत कायम करने का खूब प्रयास किया गया। लेकिन क्रांति से जन्मी आजादी की सोच ने ब्रिटिश साम्राज्य को हिला कर रख दिया था। क्रांति में सैनिकों के साथ आमजन ने भी अपने प्राणों की आहुति दी। इन वीरों के बलिदान को भुलाया नही जा सकता है। अनिल शास्त्री ने शहीदों के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होने कहा कि भारत देश को आजादी यूं ही नहीं मिली इसके लिए न जाने कितनी माताओं की गोद सूनी हुई और न जाने कितनी बहनों ने अपना सिंदूर कुर्बान कर दिया। तब जाकर भारत गुलामी की बेड़ियों से मुक्त हुआ। उन्हें याद करना हमारा कर्तव्य है। कार्यक्रम का संचालन शिक्षिका अंकिता बत्रा एवं कक्षा 12 की छात्रा पूर्वी राठी ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में ममता मलिक, रेनू चौधरी,कपिल कुमार, राजीव कुमार, अनुज कुमार, राजीव सिरोहा, विक्रान्त कुमार, अंजू दीक्षित, ज्योति पाल, स्वाति,अनुज चपराना,विपिन कुमार,अंकित खेरवाल सहित सभी अध्यापकों एवं अध्यापिकाओं का विशेष योगदान रहा। प्रधानाचार्य