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॥ श्रीयोगेश्वरी योगिनी स्तोत्रम् ॥ यह दिव्य स्तोत्र माता योगेश्वरी को समर्पित है, जो योगमार्ग को प्रकाशित करने वाली, साधकों को सिद्धि प्रदान करने वाली और मोक्षदायिनी हैं। नियमित श्रद्धापूर्वक पाठ करने से चित्त शुद्ध होता है, भय और रोग दूर होते हैं तथा साधक को योगसिद्धि की प्राप्ति होती है। 🔸 लाभ: चित्तवृत्ति का शमन साधना में प्रगति भय एवं नकारात्मक ऊर्जा का नाश ध्यान एवं समाधि में स्थिरता भुक्ति एवं मुक्ति की प्राप्ति 🙏 यदि आपको यह स्तोत्र लाभकारी लगे तो वीडियो को Like, Share और चैनल को Subscribe अवश्य करें। विशेष- कमेंट में "जय सनातन धर्म" अवश्य लिखें। __ #श्रीयोगेश्वरी #योगिनीस्तोत्र #योगसिद्धि #ध्यान #हठयोग #राजयोग #लययोग #ज्ञानयोग #भक्तिमार्ग #सनातनधर्म #ShriYogeshwari #YoginiStotram #YogSadhana #MantraJaap #SpiritualIndia #SanatanDharma #HinduMantra #Yagya #Rudraksha #Meditation #Devotional #Bhakti __ ॥ श्रीयोगेश्वरी योगिनी स्तोत्रम् ॥ ॥ ध्यानम् ॥ ॐ ध्यात्वा योगेश्वरीं देवीं योगमार्गप्रकाशिनीम् । योगमुद्राधरां शान्तां जटाजूटविभूषिताम् ॥ भस्मत्रिपुण्ड्रललितां चन्द्रार्धकृतशेखराम् । अक्षसूत्रधरां देवीं वन्दे योगेश्वरीं पराम् ॥ ॥ विनियोगः ॥ ॐ अस्य श्रीयोगेश्वरीयोगिनीस्तोत्रस्य लेखरंजन ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीयोगेश्वरी योगिनी देवता, ॐ बीजम्, ह्रीं शक्तिः, क्लीं कीलकम् । श्रीयोगेश्वरी योगिनी प्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥ ॥ करन्यासः ॥ ॐ योगेश्वर्यै अङ्गुष्ठाभ्यां नमः । ह्रीं योगमार्गदायिन्यै तर्जनीभ्यां नमः । क्लीं समाधिदात्र्यै मध्यमाभ्यां नमः । ऐं ज्ञानप्रदायिन्यै अनामिकाभ्यां नमः । सौः कैवल्यदायिन्यै कनिष्ठिकाभ्यां नमः । ॐ ह्रीं क्लीं करतालकरपृष्ठाभ्यां नमः ॥ ॥ अंगन्यासः ॥ ॐ योगेश्वर्यै हृदयाय नमः । ह्रीं योगसिद्ध्यै शिरसे स्वाहा । क्लीं समाधिप्रदायिन्यै शिखायै वषट् । ऐं ज्ञाननेत्रायै कवचाय हुं । सौः कैवल्यरूपिण्यै नेत्रत्रयाय वौषट् । ॐ ह्रीं क्लीं सर्वाङ्गाय नमः ॥ ॥ स्तोत्रम् ॥ नमस्ते योगनिलये योगेश्वरि नमोऽस्तु ते । अष्टाङ्गयोगसारज्ञे साधकानां हिते रते ॥ चित्तवृत्तिनिरोधाय त्वं माता परमं गतिः । राजयोगलये देवि भक्तमोक्षप्रदायिनि ॥ हठयोगप्रबोधिनि लययोगविलासिनि । ज्ञानयोगप्रकाशेन तमसः पाशभेदिनि ॥ योगिनीगणसंयुक्ते शिववक्षःस्थिता सदा । योगिनां गुरुरूपेण मौनमन्त्रप्रकाशिनि ॥ सिद्धिसाधनरूपेण ध्यानधारास्वरूपिणि । भवबन्धविनाशाय योगेश्वरि नमो नमः ॥ ॥ फलश्रुतिः ॥ इदं स्तोत्रं पठेन्नित्यं योगेश्वरीप्रसादतः । योगसिद्धिं लभेत् शीघ्रं ध्यानवैभवसंयुताम् ॥ न रोगो न भयं तस्य न चित्तविकलत्वता । समाधिसुखसंपन्नो योगमार्गे प्रतिष्ठितः ॥ लेखरंजनकृते स्तोत्रे योगेश्वरीप्रसादतः । भुक्तिं मुक्तिं च लभते सत्यं सत्यं न संशयः ॥ __ 🔱 ॥ श्रीयोगेश्वरी योगिनी स्तोत्रम् ॥ पाठ विधि 🔱 यह साधक को शीघ्र योगसिद्धि, चित्तशुद्धि और साधना में स्थिरता प्रदान करती है। 🕉 1️⃣ तैयारी (पूर्व साधना) प्रातः ब्रह्ममुहूर्त (4–6 बजे) या सायंकाल सूर्यास्त के बाद समय श्रेष्ठ। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें (पीत या भगवा उत्तम)। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। आसन: कुशासन, ऊन का आसन या स्वच्छ चटाई। सामने दीपक, धूप और यदि संभव हो तो माता योगेश्वरी का चित्र/यंत्र स्थापित करें। रुद्राक्ष माला हो तो उत्तम। 🔥 2️⃣ संकल्प दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प करें: “मैं (अपना नाम) श्रद्धा और भक्ति से श्रीयोगेश्वरी योगिनी स्तोत्र का पाठ कर रहा/रही हूँ, कृपा कर साधना में सिद्धि प्रदान करें।” जल पृथ्वी पर छोड़ दें। 🧘 3️⃣ प्रारंभ क्रम ॐ का 11 बार जप। गणेश वंदना (संक्षेप में)। गुरु स्मरण। फिर ध्यानम् का पाठ — देवी के स्वरूप का ध्यान करें। ✋ 4️⃣ न्यास विधि (यदि संभव हो) करन्यास अंगन्यास (यदि पूर्ण विधि न कर सकें तो सीधे स्तोत्र पाठ भी कर सकते हैं।) 📖 5️⃣ स्तोत्र पाठ पूरे स्तोत्र का श्रद्धा से पाठ करें। न्यूनतम 1 बार, श्रेष्ठ 3 बार, विशेष साधना में 11 या 21 बार। जप के अंत में “ॐ ह्रीं क्लीं योगेश्वर्यै नमः” 108 बार जप सकते हैं। 🌺 6️⃣ समापन फलश्रुति का पाठ करें। हाथ जोड़कर प्रार्थना: “हे माता योगेश्वरी, मेरे चित्त को स्थिर करें और साधना में उन्नति दें।” आरती करें (यदि संभव हो)। अंत में शांति मंत्र। 📅 विशेष दिवस सोमवार गुरुवार अष्टमी / पूर्णिमा नवरात्रि में विशेष फलदायी ✨ साधना नियम 21 दिन नियमित पाठ करने से विशेष अनुभव संभव। सात्त्विक आहार रखें। असत्य, क्रोध, अपशब्द से बचें। ब्रह्मचर्य एवं संयम का पालन साधना को तीव्र बनाता है।