У нас вы можете посмотреть бесплатно Ep.99: Jain Darshan — Karm aur Hamari Samajh | Gyanavaran Karm Kya Hai? | jinvani shorts или скачать в максимальном доступном качестве, видео которое было загружено на ютуб. Для загрузки выберите вариант из формы ниже:
Если кнопки скачивания не
загрузились
НАЖМИТЕ ЗДЕСЬ или обновите страницу
Если возникают проблемы со скачиванием видео, пожалуйста напишите в поддержку по адресу внизу
страницы.
Спасибо за использование сервиса ClipSaver.ru
क्या आत्मा वास्तव में अनंत ज्ञान वाली है? तो फिर हम सब कुछ स्पष्ट क्यों नहीं जानते? क्यों सत्य सामने होते हुए भी समझ अधूरी रह जाती है? क्या अज्ञान केवल जानकारी की कमी है? या कोई ऐसा कर्म है जो जानने की शक्ति को धीरे–धीरे ढक देता है? जय जिनेन्द्र। नई अध्ययन-आधारित श्रृंखला “जैन दर्शन — कर्म और हमारी समझ” के तीसरे भाग (Ep.99) में आपका स्वागत है। पहले भाग (Ep.97) में हमने कर्म क्या है — यह समझने का प्रयास किया था। दूसरे भाग (Ep.98) में हमने कर्मों के आठ मुख्य प्रकारों की संरचना को समझा था — घातिया और अघातिया कर्म। अब इस तीसरे भाग (Ep.99) में हम उन आठ कर्मों में से पहले कर्म का अध्ययन कर रहे हैं — ज्ञानावरण कर्म — जानने की शक्ति पर प्रभाव। • अब यहाँ एक स्वाभाविक प्रश्न उठता है — यदि आत्मा का स्वभाव ज्ञान है, तो फिर ज्ञान सीमित क्यों दिखाई देता है? क्या यह आत्मा की कमी है? या कर्म का आवरण? इस भाग में हम यह समझने का प्रयास करेंगे — [00:00:09] प्रस्तावना: ज्ञान और अज्ञान का मूल द्वंद्व [00:01:41] ज्ञानावरण कर्म का वास्तविक स्वरूप [00:03:19] ज्ञान बाहर से भीतर नहीं आता (ब्लैंक स्लेट का खंडन) [00:04:42] 'आहा मोमेंट' (Aha Moment) का दार्शनिक अर्थ [00:06:26] घने कोहरे का सटीक उदाहरण [00:10:54] ज्ञान के ५ भेद और उन पर आवरण [00:14:48] ज्ञान का नाश vs ज्ञान का छिपना (कंप्यूटर की हिडन फाइल) [00:17:25] 'जीभ की नोक' (Tip of the Tongue) का मनोवैज्ञानिक अनुभव [00:20:45] आंशिक ज्ञान (अधूरी समझ) के भयंकर परिणाम [00:23:22] यह कर्म आत्मा से बंधता कैसे है? (योग और कषाय) [00:25:22] अहंकार और क्रोध का ज्ञान पर सीधा प्रहार [00:28:52] क्या यह कर्म सभी पर एक समान असर डालता है? [00:31:50] निमित्त (माध्यम) और उपादान (स्वयं की शक्ति) [00:34:02] कर्म का क्षयोपशम (धुंधले शीशे का उदाहरण) [00:40:44] मोतियाबिंद (Cataract) और ज्ञान का धीरे-धीरे प्रकट होना [00:43:12] केवल ज्ञान की प्राप्ति की अनिवार्य शर्त [00:46:02] पक्षी और धागे का निष्कर्ष [00:48:20] Thank you यह भाग ज्ञानावरण कर्म की प्रक्रिया तक सीमित है। अन्य कर्मों का विश्लेषण आगे के भागों में क्रमबद्ध रूप से किया जाएगा। 📚 शोध व स्रोत (Research & References): इस पूरे भाग में मुख्य रूप से इन दो ग्रंथों का उपयोग किया गया है — • तत्त्वार्थसूत्र — आचार्य उमास्वामी जी • गोम्मटसार (जीवकाण्ड) — आचार्य नेमिचंद्र सिद्धांत चक्रवर्ती किसी भी आधुनिक मनोविज्ञान, अन्य दर्शन या बाहरी सिद्धांत का उपयोग नहीं किया गया है। 🎧 Podcast Series Info: श्रृंखला: Jain Darshan — Karm aur Hamari Samajh भाग: 3 (Ep.99) 🔹 Presented by: Rushabh Jain & Jinvani Shorts 🔹 Research & Script: Jain Shastras based study 🔸 Narration: AI Voice (Directed by Rushabh Jain) 🔸 Editor: Rushabh Jain ✅ 100% Original content — researched, written & produced by our team. यह प्रस्तुति हमारे स्वयं के अध्ययन और मनन पर आधारित है। हम अभी सीख रहे हैं और जैन दर्शन को सरल भाषा में क्रमबद्ध रूप से समझने का प्रयास कर रहे हैं। 📅 अगला भाग: दर्शनावरण कर्म — ग्रहण करने की क्षमता पर प्रभाव जुड़े रहिए इस अध्ययन-यात्रा के साथ। जय जिनेन्द्र। #GyanavaranKarm #JainDarshan #KarmSiddhant #JinvaniShorts #HindiPodcast