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क्या हम सच को पूरा देख पाते हैं? यदि आत्मा में दर्शन की शक्ति है, तो फिर सत्य कभी धुँधला क्यों दिखाई देता है? क्यों ग्रहण तो होता है, पर स्पष्टता अधूरी रह जाती है? क्या यह केवल इन्द्रियों की सीमा है? या जैन दर्शन के कर्म सिद्धांत के अनुसार कोई ऐसा घातिया कर्म है जो हमारी दृष्टि पर आवरण डाल देता है? जय जिनेन्द्र। नई अध्ययन-आधारित श्रृंखला “जैन दर्शन — कर्म और हमारी समझ” के चौथे भाग (Ep.100) में आपका स्वागत है। पहले भाग (Ep.97) में हमने कर्म क्या है — यह समझने का प्रयास किया था। दूसरे भाग (Ep.98) में हमने कर्मों के आठ मुख्य प्रकारों की संरचना को समझा था। तीसरे भाग (Ep.99) में हमने ज्ञानावरण कर्म — जानने की शक्ति पर उसके प्रभाव को समझा। अब इस चौथे भाग (Ep.100) में हम अध्ययन कर रहे हैं — दर्शनावरण कर्म — ग्रहण करने और देखने की क्षमता पर उसका प्रभाव। इस भाग में हम Darshanavaran Karm kya hai और जैन दर्शन में दर्शन की वास्तविक भूमिका को समझने का प्रयास कर रहे हैं। यह प्रस्तुति Jain philosophy podcast Hindi के रूप में सरल भाषा में रखी गई है, ताकि कर्म और आत्मा के संबंध को स्पष्ट रूप से समझा जा सके। यदि आत्मा देखने और ग्रहण करने वाली है, तो फिर दृष्टि सीमित क्यों हो जाती है? क्या यह आत्मा की कमी है? या Jain karm siddhant का गहरा सिद्धांत? इस भाग में हम यह समझने का प्रयास करेंगे — [CHAPTERS HERE – YOU WILL ADD] यह भाग दर्शनावरण कर्म की प्रक्रिया तक सीमित है। 📚 शोध व स्रोत (Research & References): इस पूरे भाग में मुख्य रूप से इन ग्रंथों का उपयोग किया गया है — • तत्त्वार्थसूत्र — आचार्य उमास्वामी जी • गोम्मटसार (जीवकाण्ड) — आचार्य नेमिचंद्र सिद्धांत चक्रवर्ती जी यह अध्ययन Tattvartha Sutra karm siddhant और गोम्मटसार के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। किसी भी आधुनिक मनोविज्ञान, अन्य दर्शन या बाहरी सिद्धांत का उपयोग नहीं किया गया है। 🎧 Podcast Series Info: श्रृंखला: Jain Darshan — Karm aur Hamari Samajh भाग: 4 (Ep.100) 🔹 Presented by: Rushabh Jain & Jinvani Shorts 🔹 Research & Script: Jain Shastras based study 🔸 Narration: AI Voice (Directed by Rushabh Jain) 🔸 Editor: Rushabh Jain ✅ 100% Original content — researched, written & produced by our team. यह प्रस्तुति हमारे स्वयं के अध्ययन और मनन पर आधारित है। हम अभी सीख रहे हैं और जैन दर्शन को सरल भाषा में क्रमबद्ध रूप से समझने का प्रयास कर रहे हैं। 📅 अगला भाग: अब स्वाभाविक रूप से एक और प्रश्न सामने आता है — यदि आत्मा देखने और जानने वाली है, तो फिर वह सुख और दुःख का अनुभव क्यों करती है? क्या यह केवल बाहरी परिस्थितियों का परिणाम है? या कोई ऐसा कर्म है जो अनुभव की अवस्था को निर्धारित करता है? अगले भाग में हम वेदनीय कर्म को समझने का प्रयास करेंगे — जो आत्मा के सुख और दुःख के अनुभव से जुड़ा है। जुड़े रहिए इस अध्ययन-यात्रा के अगले चरण के साथ। जय जिनेन्द्र। #DarshanavaranKarm #JainDarshan #KarmSiddhant #JinvaniShorts #HindiPodcast