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रावतसर का प्रसिद्ध मंदिर बाबा खेतरपाल का इतिहास। History of Baba Khetrapar, famous temple of Rawatsar #rawatsarmela #KhetarpalTempleRawatsar #pawan_suthar Frequently Asked Question 1. Which is the nearest landmark ? You can easily locate the establishment as it is in close proximity to Near Tehsil 2. What are its hours of operation ? The establishment is functional on Monday:- 9:30 Am - 6:30 Pm Tuesday:- 9:30 Am - 6:30 Pm Wednesday:- 9:30 Am - 6:30 Pm Thursday:- 9:30 Am - 6:30 Pm Friday:- 9:30 Am - 6:30 Pm Saturday:- 9:30 Am - 6:30 Pm Sunday:- Closed 3.map- https://www.justdial.com/Hanumangarh/... रावतसर:- धर्म नगरी के नाम से मशहूर रावतसर कस्बे मे यूँतो कई मन्दिर व देव स्थान है लेकिन बाबा खेतरपाल मन्दिर की आस्था भारतवर्ष के कोने कोने मे फैली हुई है। दूर दराज से श्रद्धालु बाबा खेतरपाल जी के धोक लगा कर अपनी मन्नते पूरी करने के लिए आते है। राजस्थान के जिला हनुमानगढ के रावतसर तहसील मे मेगा हाईवे हनुमानगढ रोड़ पर स्थित बाबा खेतरपाल मन्दिर है। कस्बे के धणी कहे जाने वाले बाबा खेतरपाल जी के कई चमत्कारो के कारण इनकी ख्याती दूर दूर तक फैली हुई है। दूर दराज से आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामने पूरी होने पर लडडू,बतासे,तैल,सिन्दूर आदि का प्रसाद चढाते है। वही अनेकेा श्रद्धालु उबले चने (बाकळे) व जिवित बकरे जिसे अमर बकरे के नाम से जाना जाता है को भी चढाते है। इस मन्दिर मे भारी संख्या मे आने वाले श्रद्धालुओ के लिए रहने ठहरने आदि का पूरा प्रबन्ध मन्दिर निर्माण कमेटी द्वारा किया हुआ है। मन्दिर की स्थापना:- मन्दिर स्थापना के बारे मे यू ंतो कई कथाऐं प्रचलित है लेकिन मन्दिर के मुख्य पुजारी नारायण सिंह सुडा (राठौड़) ने बताया कि इस मन्दिर की स्थापना वर्ष 1593 मे रावत राघोदास जी द्वारा हुई थी । वर्ष 1593 मे रावत राघोदास जी व बीकानेर के राजा रायंिसह जी सेना के साथ दक्षिण भारत मे गये हुये थे। वहंा पर भयकंर अकाल पड़ा हुआ था सेना सहित सभी दाने दाने को मोहताज हो गये थे। राजा रायंिसह सहित सैनिक एक दूसरे से बिछुड़ गये थे । राजा रायंिसहं जी व राघोदास जी को बियाबान जगंल मे दूर दूर तक कोई नजर नही आया । दोनो जने सेना को तलाशते हुए एक टीले की ओर चले तो उन्हे टीले पर एक कुटिया नजर आयी दोनो जने उस कुटीया की ओर चले तो कुटिया के आगे एक कुता बैठा दिखाई दिया। दोनो को देख कर कुते ने कान फड़फडाये तो कुटिया के अन्दर ध्यान मुद्रा मे बैठे एक महात्मा ने दोनो को आवाज देकर कुटिया के अन्दर आने को कहा । दोनो महात्मा के पास निचे जमीन पर बैठ गये । महात्मा जी ने दोनो से बियाबान जगंल मे आने का कारण पूछा तो राजा रायसिंह ने बताया कि उनकी सेना उनसे बिछुड़ गयी है और हम दोनो का भूख प्यास से भी बुरा हाल है। तो महात्मा जी ने अपने कमण्डल की और इशारा कर कहा कि इस कमण्डल मे पानी है दोनो पी लो । राजा राजसिंह ने सोचा की कमण्डल मे दो घूंट पानी से दोनो जनो की प्यास कैसे बुझेगी। महात्मा जी ने फिर कहा कि कमण्डल से पानी पी लो । राजा रायंिसह व राघोदास जी ने उस कमण्डल से पानी पीकर अपनी प्यास बुझा ली लेकिन कमण्डल मे उतना ही पानी शेष देखकर दोनो ने सौचा की ये महात्मा कोई साधारण नही अपितु कोई सिद्ध पुरूष है । तभी महात्मा जी ने राजा रायसिंह से कहा कि बाहर जा कर आवाज लगाओ तुम्हारी सेना भी आ जायेगी। राजा ने बाहर जाकर सेना का आवाज लगायी तो चारो तरफ से सैनिक आते दिखाई देने लगे। तब राजा रायंिसह ने महात्मा जी से अपनी व सैना के भूखे होने की बात बतायी तो महात्मा जी ने कहा कि कुटिया मे भोजन रखा है सभी खा लो तो राजा रायंिसह ने देखा कि एक थाली मे थोड़ा से भोजन रखा है उससे सभी कैसे खायेगें । लेकिन महात्माजी के चमत्कार के कारण पूरी सेना व दोनो जनो ने आराम से भूख मिटा ली । उस दौरान इस इलाके मे भी भारी भूखमरी फैली हुई थी । राजा रायंिसह ने रावत राघोदास जी से कहा कि क्यो ना इन महात्माजी को अपने क्षैत्र मे ले चले ताकि वहां की भूखमरी दूर हो सके । इस पर दोनो जनो ने महात्मा जी से अपने इलाके मे चलने का निवेदन किया। महात्मा जी बोले कि मेरे 52 रूप है यंहा पर जगलीं जानवर, राक्षस, भूत ,जीन आदि सभी को उनके अनुसार खाना खिलाता हूं। राजा रायसिंह व रावत राघोदास के अधिक निवेदन करने पर महात्मा जी बोले की एक ही शर्त पर मे तुम्हारे साथ जा सकता हूं ....... आगे पूरा इतिहास देखने क लिए लिंक ओपन करे - http://www.hinduastha.com/2016/11/Ket... दोहा:- सातां रिपिया सेर, दाणो मिले न दक्खन में ।। रोटियां दीनी रैन, रावत राघोदास थै।। RJ Desi vlog by pawan suthar ki terf se aap sbhi ko ram ram 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏