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ये कहानी को सुनने मात्र से करोड़ों जन्म के पाप नष्ट हो जाएंगे ! कृष्ण लीला कथा ! #premanandjimaharaj #katha #krishna #krishnaleela #premanandjipravachan #satsang #pravachan #premanand #premanandji उद्धव का ब्रज आगमन: भगवान श्रीकृष्ण मथुरा जाने के बाद अपने मित्र और परम ज्ञानी उद्धव जी को ब्रज भेजते हैं ताकि वे गोपियों को योग और निराकार ब्रह्म ज्ञान का उपदेश देकर उनके दुख को शांत कर सकें। गोपियों का उत्तर: जब उद्धव जी गोपियों को योग का उपदेश देते हैं, तो गोपियां कहती हैं कि "उधो मन न भए दस बीस" — अर्थात् हमारे पास दस-बीस मन नहीं हैं, हमारे पास एक ही मन था जो श्यामसुंदर (श्रीकृष्ण) के साथ चला गया। अब हम तुम्हारे इस ज्ञान को किस मन से धारण करें? हृदय में स्थान नहीं: गोपियां स्पष्ट कहती हैं कि जब हमारा पूरा हृदय श्रीकृष्ण के प्रेम से भरा है, तो उसमें तुम्हारे ब्रह्म-ज्ञान के लिए कोई स्थान नहीं बचा है। भ्रमरगीत (भौरे को उलाहना): इसी बीच एक भौंरा (भ्रमर) वहां आता है। गोपियां उस भौंरे को प्रतीक मानकर श्रीकृष्ण को उलाहने (शिकायतें) देती हैं। वे कहती हैं कि श्रीकृष्ण भी इस भौंरे की तरह निर्मोही हैं जो रस लेकर चले गए, लेकिन हम उनके प्रेम और उनकी कथाओं की चर्चा के बिना जीवित नहीं रह सकतीं। उद्धव जी का हृदय परिवर्तन: गोपियों की परम-प्रेम दशा और उनके निरंतर बहते आंसुओं को देखकर परम ज्ञानी उद्धव जी का सारा 'ज्ञान का अभिमान' टूट जाता है। वे समझ जाते हैं कि भगवान को कोरे ज्ञान या योग से नहीं, बल्कि गोपियों जैसे अनन्य प्रेम से ही पाया जा सकता है। उद्धव की कामना: अंत में ज्ञानमार्गी उद्धव जी कामना करते हैं कि वे वृंदावन की घास, लता या धूल बन जाएं, ताकि इन परम-प्रेमी गोपियों के चरणों की रज (धूल) उन्हें प्राप्त हो सके।