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बग्वाल मेला 2025 | देवीधुरा मां बाराही धाम | विश्व प्रसिद्ध फूल-बग्वाल ।@Taragi&FamilyVlogs #BagwalMela2025 #DevidhuraFair #MaaBarahiDham #ChampawatUttarakhand #FloralBagwal #KumaonCulture #UttarakhandTourism #RakhiFestival #TraditionalFestivalIndia #DevbhoomiUttarakhand या Bagwal Mela 2025 Devidhura | Maa Barahi Dham | Floral Bagwal Festival@Taragi&FamilyVlogs SEO:- Description:- बग्वाल मेला 2025 (Bagwal Mela 2025) उत्तराखंड के चंपावत जिले के देवीधुरा स्थित मां बाराही धाम में आयोजित विश्व प्रसिद्ध उत्सव है। रक्षाबंधन के दिन चार खाम (लमगड़िया, चमियाल, गहड़वाल, बालिक) के योद्धा फूल और फल के आदान-प्रदान के साथ मां बाराही की पूजा करते हैं। यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से कुमाऊं की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा रही है। इस वीडियो में देखें — मां बाराही धाम के अद्भुत दृश्य, पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-नगाड़ों की गूंज, और फ्लोरल बग्वाल की रोमांचक झलक। 📍 स्थान: देवीधुरा, चंपावत, उत्तराखंड 📅 मुख्य तिथि: 9 अगस्त 2025 (रक्षाबंधन) 🎯 खासियत: फूल और फल की बग्वाल, धार्मिक आस्था, कुमाऊं की संस्कृति अगर आपको यह वीडियो पसंद आए तो लाइक, शेयर और सब्सक्राइब जरूर करें ताकि आपको उत्तराखंड की और भी रोचक व सांस्कृतिक वीडियो मिलती रहें। 3. हाई-रैंक Bagwal Mela 2025, Devidhura Mela 2025, Maa Barahi Dham, Champawat Fair, Floral Bagwal 2025, Bagwal Festival Uttarakhand, Devidhura Fair 2025, Kumaon Culture Festival, Raksha Bandhan Bagwal, World Famous Bagwal Mela, Uttarakhand Fair 2025, देवधुरा बग्वाल मेला 2025, मां बाराही धाम मेला, उत्तराखंड बग्वाल मेला, फ्लोरल बग्वाल, कुमाऊं की संस्कृति 4. थंबनेल "विश्व प्रसिद्ध बग्वाल मेला 2025 – मां बाराही धाम की अद्भुत झलक" बग्वाल मेला 2025 – प्रमुख जानकारी तारीख और अवधि यह मेला 5 अगस्त से 16 अगस्त 2025 तक आयोजित किया गया था, जिसमें मुख्य बग्वाल (पत्थर/फूल युद्ध) कार्यक्रम 9 अगस्त (रक्षाबंधन) को हुआ। शुभारंभ जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक द्वारा पूर्ण वैदिक विधि-विधान एवं रिबन काटकर किया गया। आयोजन की परंपरा और मूल्य बग्वाल मेला मां बाराही (वराही) को समर्पित है, जो देवीधुरा मंदिर में स्थित हैं—यह मंदिर प्राचीन और महत्वपूर्ण शक्तिपीठ माना जाता है। परंपरागत रूप से इसमें चार खाम—लमगडिया, चमियाल, गहड़वाल, वालिक—और आसपास के गाँवों के योद्धा “द्योका” के रूप में भाग लेते हैं। यह परंपरा मूलतः नरबलि के प्रतीक के रूप में शुरू हुई थी, जिसमें पत्थरों के युद्ध (stone-pelting) द्वारा देवी को मानव-रक्त का प्रतीकात्मक अर्पण होता था। आधुनिक रूपांतरण 2013 में उच्च न्यायालय के निर्देश पर, इस खेल में अब पत्थरों की जगह फूल और फल का उपयोग किया जाता है। इस वर्ष बग्वाल केवल 8 मिनट (1:58 pm–2:06 pm) तक चला। इस दौरान 12 क्विंटल फल और 3 क्विंटल फूल उपयोग किए गए और कुछ स्टोनों का समाश्रयात्मक रूप से समापन में उपयोग हुआ। पूरे आयोजन में 187 प्रतिभागी घायल हुए, फिर भी इसे देवी का प्रसाद माना गया। सारांश तालिका विषय विवरण मेला अवधि 5–16 अगस्त 2025 मुख्य तिथि बग्वाल: 9 अगस्त (रक्षाबंधन) स्थान देवीधुरा, चंपावत, मां बाराही धाम परंपरा चार खामों के बीच पत्थर युद्ध का अनूठा धार्मिक उत्सव आधुनिक रूप फूल-फल युद्ध, अधिक समय-सापेक्ष, कम हिंसात्मक सुरक्षा स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित Taragi and family vlogs ll Please like and subscribe 🙏 🙏 ll Thank you for watching ☺️ 😊 ll aapka बहुत-बहुत dhanyvad ll