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अपनी और अपने मित्रों की सेना के साथ मथुरा पर आक्रमण पर निकला जरासंध अपने गुप्तचर से संकेत मिलते ही सैनिकों को पहाड़ियों से घिरे मथुरा के बाहर शिविर लगाने का आदेश देते हुए कहता है कि सेना आधी रात तक विश्राम करें और सूर्योदय से पूर्व आक्रमण के लिए तैयार किया जाए तथा किसी भी प्रकार की मशाल या दीपक ना जलाया जाए जिससे मथुरा वालों को सेना की उपस्थिति का आभास न हो। जरासंध को विश्वास होता है कि प्रातः जैसे ही मथुरा के द्वार खुलेंगे, उसकी सेना नगर में घुसकर सब कुछ नष्ट कर देगी। किन्तु जरासंध की इस योजना को मथुरा के दो गुप्तचर देख लेते हैं। वे पहाड़ी की एक गुप्त गुफा के मार्ग से होते हुए अक्रूर के पास पहुँचते हैं और उन्हें सूचना देते हैं कि जरासंध की सेना पहाड़ी के पीछे डेरा डाले हुए है, जो आधी रात तक विश्राम करेगी। अक्रूर स्थिति को तुरंत समझ जाते हैं और कहते हैं कि शत्रु पूरी रात नहीं, अब केवल आधी रात विश्राम करेगा। वे तत्काल एक सटीक रणनीति बनाते हैं - मथुरा की एक सैन्य टुकड़ी पहाड़ी के ऊपर से उतरकर आक्रमण करेगी, जबकि दूसरी टुकड़ी पहाड़ी का चक्कर काटकर शत्रु सेना के पीछे पहुँच जाएगी, जिससे जरासंध की सेना चारों ओर से घिर जाएगी और उनके भागने का कोई मार्ग न बचेगा। अक्रूर जी की योजना के अनुसार मथुरा की सेना चुपचाप रात्रि में जरासंध के शिविर को चारों दिशाओं से घेर लेती है। अक्रूर आकाश की ओर देखकर “जय श्रीकृष्ण” का उच्चारण करते हैं और प्रभु का आशीर्वाद पाकर “हर-हर महादेव” के उद्घोष के साथ आक्रमण का आदेश देते हैं। अचानक हुए इस भीषण आक्रमण से जरासंध की सैन्य शिविर में भगदड़ मच जाती है। सेनापति वर्धक सहित अन्य सेनानायक चौंक जाते हैं। मथुरा के सैनिक शिविर में प्रवेश कर मारकाट शुरू कर देते हैं और चारों ओर आग लगा देते है। नींद से जागे जरासंध के पास वर्धक दौड़कर आता है और धोखे की सूचना देता है। जरासंध तत्काल शल्य, बाणासुर, वामासुर और रुक्मि को युद्ध के लिए बुलाने का आदेश देता है। वह स्वयं रथ पर सवार होकर मायावी अस्त्रों का प्रयोग करने लगता है, जिससे मथुरा की सेना को भारी क्षति पहुँचती है। शल्य भी अपने रथ से वही करता है। यह दृश्य देखकर अक्रूर चिंतित हो जाते हैं, क्योंकि इस प्रकार के अस्त्रों का सामना करना उनके वश में नहीं होता। उसी क्षण आकाश में बिजली कौंधती है और श्रीकृष्ण तथा बलराम अपने रथों पर युद्धभूमि में प्रकट होते हैं। उनके आगमन से मथुरा की सेना में उत्साह का संचार हो जाता है, जबकि जरासंध और उसके साथी भयभीत हो जाते हैं। घमासान युद्ध के पश्चात जरासंध और उसके सहयोगी पराजित होकर भाग जाते हैं। इसके बाद भी जरासंध बार-बार सेना संगठित कर मथुरा पर आक्रमण करता है, किंतु हर बार श्रीकृष्ण और बलराम के हाथों पराजित होता रहता है। सत्रह बार हारने के बाद भी उसका अहंकार और प्रतिशोध समाप्त नहीं होता। उसकी अपनी सभा में भी युद्ध को लेकर मतभेद उत्पन्न होने लगते हैं। रुक्म का मत है कि निरंतर युद्ध निरर्थक है और श्रीकृष्ण से संधि कर लेनी चाहिए, क्योंकि वे कोई साधारण मानव नहीं, बल्कि अलौकिक शक्ति के स्वामी हैं। शिशुपाल इस विचार को कायरता बताकर ठुकरा देता है और युद्ध जारी रखने की बात करता है। इन सब बातों को सुनकर श्रीकृष्ण निष्कर्ष निकालते हैं कि जब तक वे मथुरा में रहेंगे, जरासंध मथुरा पर बार-बार आक्रमण करता रहेगा और नगर संकट में रहेगा। वह जरासंध के जन्म की कथा विस्तार से सुनाते हैं और बताते हैं कि जरा नामक राक्षसी द्वारा उसके दो खंडों को जोड़े जाने के कारण वह बार-बार पुनर्जीवित हो जाता है। इसलिए वह साधारण शत्रु नहीं है। साथ ही श्रीकृष्ण यह संकेत भी देते हैं कि भविष्य में जरासंध किसी मलेच्छ शक्ति कालयवन की सहायता से नया संकट खड़ा करेगा। इससे स्पष्ट हो जाता है कि मथुरा का संकट अभी टला है, समाप्त नहीं हुआ है। सम्पूर्ण जगत में भगवान विष्णु के आठवें अवतार एवं सोलह कलाओं के स्वामी भगवान श्री कृष्ण काजीवन धर्म, भक्ति, प्रेम, और नीति का अद्भुत संगम है। वसुदेव और देवकी के पुत्र के रूप में कारागार में जन्म लेकर गोकुल की गलियों में यशोदा और नंदबाबा के यहाँ पलने वाले, अपनी लीलाओं, जैसे पूतना वध, माखन चोरी, राधा के संग प्रेम, गोपियों के साथ रासलीला और कालिया नाग के दमन के लिए प्रसिद्ध श्री कृष्ण ने युवावस्था में मथुरा कंस का वध करके जनमानस को उसके अत्याचार से मुक्त कराया एवं स्वयं के लिए द्वारका नगरी स्थापना भी की। उनका जीवन केवल लीलाओं तक सीमित नहीं था। उन्होंने समाज को धर्म और कर्म का गूढ़ संदेश देने के लिए महाभारत के युद्ध में पांडवों का मार्गदर्शन किया और अर्जुन के सारथी बनकर उसे "श्रीमद्भगवद्गीता" का उपदेश दिया, जो आज भी जीवन की समस्याओं का समाधान बताने वाला महान ग्रंथ माना जाता है। श्री कृष्ण का जीवन प्रेम, त्याग, और नीति का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। आपका प्रिय चैनल "तिलक" श्री कृष्ण के जीवन से जुड़ा यह विशेष संस्करण "श्री कृष्ण जीवनी" आपके समक्ष प्रस्तुत है, जिसमें भगवान श्री कृष्ण के जीवन से जुड़ी कथाओं का संकलन किया गया है। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिए और तिलक से जुड़े रहिए। #tilak #krishna #shreekrishna #shreekrishnajeevani #krishnakatha