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श्री विन्ध्येश्वरी स्तोत्रम् माँ विन्ध्येश्वरी की स्तुति है, जो शक्ति, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति के लिए एक आध्यात्मिक अभ्यास है। इस स्तोत्र में देवी को कई रूप में वर्णित किया गया है, जैसे निशुम्भ और शुम्भ जैसे राक्षसों का नाश करने वाली, वन और रण में प्रकाशमान, और घर-घर में निवास करने वाली देवी। यह स्तोत्र भक्तों को शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति दिलाकर धन, सुख और वैभव प्रदान करता है। Subscribe us :- @spirtualactivity ► Album - Shri Vindhyavasini Stotram ► Song - Shri Vindhyavasini Stotram ► Singer - Rinky Vishwakarma ► Music - Kailash Kumar Shrivastav ► Lyrics - Traditional ➤ Label - Vianet Media ➤ Sub Label - Ambey ➤ Parent Label - Shubham Audio Video Pvt. Ltd. 91783-DVT_VNM/13506-TDVT-10485 #ShriVindhyavasiniStotram #श्रीविन्ध्येश्वरीस्तोत्रम् #VindhyavasiniMata #RinkyVishwakarma #NavratriSpecial #DeviStotram #MaaVindhyavasini #StotraPath #DeviBhajan #DurgaStuti #VindhyachalDham #NavratriBhajan #DeviUpasana #MaaKiMahima #BhaktiSong #StotramChanting #HinduDevotional #MataKiStuti निशुम्भ-शुम्भ-गर्जनीं, प्रचण्ड-मुण्ड-खण्डिनीम् । वने रणे प्रकाशिनीं, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥ (१) त्रिशूल-मुण्ड-धारिणीं, धरा-विघात-हारिणीम् । गृहे-गृहे निवासिनीं, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥ (२) दरिद्र-दुःख-हारिणीं, सतां विभूति-कारिणीम् । वियोग-शोक-हारिणीं, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥ (३) लसत्-सुलोल-लोचनां, जने सदा वरप्रदाम् । कपाल-शूल-धारिणीं, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥ (४) करे मुदा गदाधरीं, शिवां शिव-प्रदायिनीम् । वरां वराननां शुभां, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥ (५) ऋषीन्द्र-जामिनी-प्रदां, त्रिधा-स्वरूप-धारिणीम् । जले-थले निवासिनीं, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥ (६) विशिष्ट-सृष्टिकारिणीं, विशाल-रूप-धारिणीम् । महोदरे विलासिनीं, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥ (७) पुरन्दरादि-सेवितां, मुरादि-वंश-खण्डिनीम् । विशुद्ध-बुद्धिकारिणीं, भजामि विन्ध्यवासिनीम् ॥ 👉 Subscribe Now: / @spirtualactivity 👉 Like us on Facebook: / spiritualactivity