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फाइनली अनु को हुआ अपने गलती का अहसास माँगी हाथ जोड़कर माफ़ी आर्य से || tum se tum tak || Amit Rajput || "दोस्तों, आज के एपिसोड में वो होने वाला है जिसे देखकर पत्थर दिल इंसान भी रो पड़ेगा। जी हाँ, आज अहंकार का पहाड़ चकनाचूर होगा और प्यार की जीत के लिए अनु को झुकना ही पड़ेगा। क्योंकि आज अनु की आँखों में वो खौफनाक पछतावा है जो इंसान को अंदर से जला देता है और वो हाथ जुड़े हैं जिन्होंने कल तक आर्या को अपनी जिंदगी से दूर धकेला था। तो क्या आर्या इस टूटी हुई अनु को गले लगाएगा या फिर हमेशा के लिए मुँह फेर लेगा? यह मंजर इतना भावुक है कि आपकी भी आँखों में आंसू आ जाएंगे। इसलिए वीडियो को पलक झपकाए बिना अंत तक देखिये क्योंकि ऑफिस के उस बंद कमरे में आज एक ऐसा फैसला होने वाला है जो सबकी तकदीर बदल देगा। कहानी की शुरुआत होती है ऑफिस में छाई एक मनहूस खामोशी से, जो किसी बड़े तूफान के आने का इशारा कर रही थी। जहाँ मीरा अपनी डेस्क पर बैठी किसी घायल शेरनी की तरह बेचैन हो रही थी। उसकी नजरें बार-बार आर्यावर्धन के बंद केबिन और फिर अनु की खाली कुर्सी पर टिक जातीं। क्योंकि पिछले कुछ दिनों से जो सन्नाटा छाया था, उसने मीरा की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया था। न तो आर्या ने ही उसे कुछ बताया था और न ही अनु के चेहरे से कुछ पढ़ा जा सकता था, सिवाय एक गहरे मातम के। अपनी इस घबराहट को शांत करने के लिए मीरा ने आर्या के सबसे वफादार साथी झेंडे से भी सवाल किया, मगर झेंडे ने हमेशा की तरह अपने होठों को सिल रखा था। और उसकी इस चुप्पी ने मीरा की बेचैनी को आग में घी की तरह भड़का दिया। मीरा को अब पक्का यकीन हो गया था कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। और यही अज्ञानता अब मीरा को एक नई और खतरनाक साजिश की तरफ धकेल रही थी। उसने कसम खा ली थी कि वो इस राज को जानकर रहेगी और अगर अनु और आर्या के बीच कोई दरार है, तो वो उसे खाई में बदल देगी ताकि आर्या हमेशा के लिए सिर्फ उसका हो जाए। दूसरी तरफ, अनु अब और इस आत्मग्लानि के अंगारों पर नहीं चल पा रही थी। उसने अपने पिता की जिद्द और समाज के डर से आर्या के उस पवित्र प्यार को ठुकराया था जो नसीब वालों को मिलता है। लेकिन आर्या की आँखों में उस दिन जो टूटता हुआ विश्वास और मौत जैसा दर्द उसने देखा था, वो मंजर अब अनु को जीने नहीं दे रहा था। उसे एहसास हो चुका था कि पिता का मान रखने के चक्कर में उसने अपने भगवान जैसे प्रेमी का कत्ल कर दिया है। और आज उसने तय कर लिया था कि चाहे दुनिया इधर की उधर हो जाए, वो अपने अहंकार को पैरों तले कुचलकर आर्या को मनाकर ही रहेगी। सब कुछ भूलकर और अपनी आँखों में आंसुओं का सैलाब लिए अनु सीधे आर्या के केबिन में पहुँच गई। जहाँ आर्या, जो पहले से ही गम के सागर में डूबा था, अनु को देख पत्थर सा खड़ा रहा। अनु ने एक पल भी नहीं गंवाया और आर्या के कदमों में गिरने जैसी हालत में हाथ जोड़कर रोते हुए कहा— 'आर्या सर, मुझसे बहुत बड़ी भूल हुई है। मैंने अपने पिता की झूठी शान के लिए आपके सच्चे प्यार का गला घोंट दिया। मुझे लगा था मैं बेटी होने का फर्ज निभा रही हूँ, लेकिन मैंने सिर्फ आपका भरोसा तोड़ने का पाप किया है। आज मैं अपना सारा घमंड त्यागकर आपके सामने भिखारी बनकर खड़ी हूँ। मैं हाथ जोड़कर आपसे भीख माँगती हूँ, मुझे माफ़ कर दीजिये। मैं आपके बिना एक पल भी नहीं जी सकती। मुझे मेरी सजा दीजिये पर मुझसे मुँह मत मोड़िये।' दूर खड़ी मीरा कांच के दरवाजे से यह सब देख रही थी। और भले ही उसे आवाजें नहीं आ रही थीं, लेकिन अनु के जुड़े हुए हाथ और उसका झुका हुआ सिर मीरा को सुकून दे रहा था कि तीर सही निशाने पर लगा है और अब वक्त आ गया है अपनी चाल चलने का। उधर आर्या ने जब अनु को इस हालत में देखा तो उसका दिल पसीज गया, मगर वो अंदर से कांच की तरह बिखर चुका था। उसने अनु के जुड़े हाथों को अपने हाथों में थामकर धीरे से नीचे किया। और उसकी आवाज़ में गुस्सा नहीं, बल्कि एक वीरान दर्द था। उसने कहा— 'अनु, माफ़ी तो शायद मिल जाए... लेकिन जो भरोसा तुमने तोड़ा है, उसके टुकड़े चुभते हैं। तुमने मुझे वहां लाकर खड़ा कर दिया है जहाँ मैं चाहकर भी तुम्हें गले नहीं लगा पा रहा। मैं अभी... मैं अभी कोई भी फैसला लेने की हालत में नहीं हूँ। बस मुझे अकेला छोड़ दो।' आर्या वहां से मुड़कर अपनी तन्हाई में खो गया और अनु वहीं खड़ी रह गई, यह जानते हुए कि रास्ता मुश्किल है मगर उसने वापसी की पहली सीढ़ी चढ़ ली है। तो दोस्तों, आपको क्या लगता है? क्या आर्या का दिल पिघलेगा या मीरा अपनी चाल में कामयाब हो जाएगी? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें!"