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गणेश जी की कहानी एक मां बेटी थी । वे रोज सूरज भगवान, विनायक जी, पथवारी माता, तुलसी, बड़ देवता की पूजा करती थी । फिर भोजन करती । ऐसा करते बहुत साल बीते, एक दिन बेटी को देखने वाले आये । बुढ़िया के कहा मेरी बेटी के नियम बहुत है, जो निभायेगा उसे ही मैं बेटी दूंगी लड़के वाले ने कहा कि तुम्हारी बेटी के क्या नियम है ? बुढ़िया ने सब बता दिया। लड़के वाले बोले हम उसके नियम निभा लेगे। शादी हो गयी बेटी ससुराल आ गई। चार-छः महीने नियम चलता रहा। एक दिन उनके घर में झगड़ा हो गया। सासू जिठानियां कहने लगी ये बाद में आकर भी देव-देव करती है, सारा काम हम ही क्यों करें। दूसरे दिन सवेरे छोटी बहू उठी और स्नान ध्यान से निवृत्त होकर पूजा को निकली। सासु, जिठानी कहने लगी, कहां चली बहू ? कल इतना झगड़ा हुआ देखा नहीं क्या ? घर के काम धंधे में ध्यान दो। बहू ने चोपड़ा रख दिया और महल में जाकर सो गई । भूखी प्यासी दो-तीन दिन तक सोती रही । भगवान सपने में आये । बहू, सोती है या जागती है । बहू बोली चिन्ता में हूं। भगवान बोले तेरी चिन्ता मिट जायेगी, उठती क्यों नहीं ? खाना क्यों नहीं खाती ? बहू बोली कैसे खाऊं ? सासू बाहर जाने नहीं देती, पूजा हो नहीं सकती। भगवान बोले, घर में ही देवता है। बहू उठी कमरा खोला और अलमारी खोली। देखती है कि विनायक जी खेजड़ी के झाड़ के नीचे बैठे है। पथवारी दही, दूधों में हिंडोले ले रही है। सात घोड़े के रथ पर सूरज भगवान चमक रहे हैं। तुलसी माता हरी भरी बैठी है । बड़ देवता, पथवारी, पीपल देवता सारे ही है। वो नीचे गई जल कलश व पूजा का थाल लाई । पूजा करी, कहानी कही, हुंकारा भगवान ने दे दिया । नीचे आके जीमने बैठी। देवरानी जैठानी कहने लगी "रूठी रानी कौन मनावे, टुक-टुक करती आप ही आवे" कहां गये तेरे नियम धरम। बहू बोली, सब कुछ किया है। आप सब चलो मैं आपको भी बताती हूँ। आगे-आगे बहू पीछे सब जने चले । कमरा खोल के अलमारी खोली तो देखा वहां तैतीस करोड़ देवी देवता विराजमान है। सासू उठकर बहू के पैर पड़ने लगी तो बहू बोली सासूजी आप सब देवताओं के पैर पड़ो मैं आपके पैर छूती हूँ । हे भगवान, बहू को दर्शन दिये वैसे सबको देना। 📜 डिस्क्रिप्शन यह एक अत्यंत पवित्र और प्रेरणादायक गणेश जी की भक्ति कथा है। इस कहानी में एक मां और बेटी की अटूट श्रद्धा दिखाई गई है, जो रोज़ नियमपूर्वक सूर्य भगवान, विनायक जी, पथवारी माता, तुलसी माता और अन्य देवताओं की पूजा करती हैं। बेटी विवाह के बाद भी अपने धर्म और नियमों का पालन करती है, लेकिन ससुराल में उसे पूजा से रोका जाता है। भूखी-प्यासी रहकर भी वह अपने विश्वास से डगमगाती नहीं है। भगवान स्वयं स्वप्न में आकर उसे समझाते हैं कि सच्ची भक्ति करने वाले के लिए पूरा घर ही मंदिर बन जाता है। अंत में जब बहू के सच्चे भक्ति भाव से 33 करोड़ देवी-देवताओं का दर्शन होता है, तब सभी को सच्ची श्रद्धा और धर्म का महत्व समझ आता है। यह कथा हमें सिखाती है कि 👉 सच्ची भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती 👉 भगवान भक्त की परीक्षा जरूर लेते हैं, लेकिन साथ कभी नहीं छोड़ते 🔱 हैशटैग #गणेशजीकीकहानी #GaneshBhakti #BhaktiKatha #HinduKahani #DharmikKatha #SanatanDharma #TrueDevotion #IndianMythology #BhagwanGanesh #FaithInGod #DevotionalStory #HinduStories #SpiritualStory #GodIsEverywhere #BhaktiVideo